शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सीएम योगी पर हमलावर हैं। उन्होंने गुरुवार को वाराणसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- दोनों डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और केशव मौर्य भाजपा को हो रही क्षति को बचाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन ये मठाधीश महाराज हठ पर उतारू हैं। कालनेमि कौन है? इसका स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। ये असली हिंदू हैं या फिर छल, वेशधारी और ढोंगी आचरण के हैं। अविमुक्तेश्वरानंद ने संत समाज को अल्टीमेटम दिया। कहा- 10 दिन में बताएं कि आप किसके साथ हैं। जो उनके पक्ष में होगा, उसके साथ भी सीएम जैसा व्यवहार किया जाएगा। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के 101 बटुकों की पूजा करने पर अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- उन्होंने ऐसा कर अपनी भावना दिखाई है। उन्होंने यह बताया कि मेरे मुख्यमंत्री, आपने जो किया वह पाप था, जिसे मैं धोने-पोंछने का प्रयास कर रहा हूं। अगर यह सब राजनीति के तहत नहीं होता, तो जिस बटुक की चोटी खींची गई थी, उसे बुलाकर पूजन करते? डिप्टी सीएम पाठक के बयान (बटुकों को पीटने पर महापाप लगेगा) पर भी अविमुक्तेश्वरानंद ने जवाब दिया। उन्होंने कहा- इससे पता चलता है कि वे कार्रवाई करने में समर्थ नहीं हैं। उनके पास पावर ही नहीं है। अविमुक्तेश्वरानंद की बड़ी बातें पढ़िए- 1- सीएम योगी ने सदन की आड़ में विषय को प्रकट किया
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, ‘सीएम योगी ने सदन की आड़ लेकर अपने भीतर भरे विषय को प्रकट किया। ऐसा नहीं करना चाहिए था। जनता के बीच आकर अपनी बात रखनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा था कि हमारे समाज में कुछ कालनेमि घुस आए हैं, जिससे समाज को क्षति होने की संभावना है। कालनेमि कौन है, इसका स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। इसलिए हम लोगों पर कालनेमि को पहचानने की जिम्मेदारी आ गई। हमने सोचा सबसे पहले इन्हीं से शुरुआत की जाए। ये असली हिंदू हैं या फिर छल, वेशधारी और ढोंगी आचरण के हैं। जब उनका आचरण और वेश देखा गया, तो उनका वेश अमंगल प्रतीत हुआ। उनका बायोडाटा देखा तो पता चला कि वे घर से विरक्त होकर निकले थे। किसी मठ में रुके, फिर वहां के महंत बन गए। जो व्यक्ति विरक्त हो जाता है, वह धर्म की शपथ लेकर कोई दूसरी शपथ स्वीकार नहीं कर सकता। लेकिन सीएम योगी ने विरक्त की शपथ लेने के बाद भी मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और वेतनभोगी बन गए।’ 2- संत समाज बताए, आप किसके साथ हैं
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, ‘संत समाज के पास 10 दिन का समय है। अगर कोई योगी आदित्यनाथ के पक्ष में रहना चाहता है तो कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन ध्यान रहे कि शास्त्र और सनातन को छोड़कर किसी के पक्ष में नहीं रहा जा सकता। अगर ऐसा रहता है, तो जो व्यवहार सीएम के साथ होगा, वही उनके साथ भी किया जाएगा। योगी के पक्ष में खड़े होने से पहले यह बताइए कि क्या कोई गेरुआ वस्त्र पहनकर मांसाहारी हो सकता है? क्या कोई विरक्त संत वेतनभोगी हो सकता है? 10 दिन में उत्तर दीजिए। अगर उत्तर नहीं दिया गया, तो हम समझेंगे कि आप मुख्यमंत्री का समर्थन कर रहे हैं।’ 3- लखनऊ में 11 मार्च को संत समाज जुटेगा
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, ’10 दिनों में हम हर संत, महंत, विद्वान और हिंदू से कहना चाहते हैं कि 11 मार्च को लखनऊ में हम सबको इकट्ठा होकर अपनी बात सबके सामने रखनी है। 10 दिन में गो-माता की रक्षा के लिए सिर्फ दो काम किए गए। एक- ‘गोदान’ नाम की फिल्म रिलीज कर उसे टैक्स फ्री कर दिया। क्या इससे गो-माता की रक्षा हो जाएगी? दूसरा- सभी डीएम को संदेश भेजा गया कि गोशालाओं को ठीक-ठाक करें। क्या वे ठीक-ठाक होंगी? यह संदेश भी कारगर नहीं दिखा। तीसरा- सीएम योगी ने खुद विधानसभा में खड़े होकर झूठ बोला।’ मौनी अमावस्या पर क्या हुआ था, जानिए
18 जनवरी को प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी पुलिस ने रोक दी। पुलिस ने उनसे पैदल संगम जाने को कहा। शंकराचार्य के शिष्य नहीं माने और पालकी लेकर आगे बढ़ने लगे। इस पर शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। पुलिस ने कई शिष्यों को हिरासत में ले लिया था। पुलिस ने एक साधु को चौकी में भी पीटा था। इससे शंकराचार्य नाराज हो गए थे। शिष्यों को छुड़वाने पर अड़ गए। अफसरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, हाथ जोड़े, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद पुलिस ने शंकराचार्य के कई और समर्थकों को हिरासत में ले लिया था। शंकराचार्य की पालकी को खींचते हुए संगम से 1 किमी दूर ले जाया गया। इस दौरान पालकी का क्षत्र भी टूट गया। शंकराचार्य स्नान भी नहीं कर पाए। शंकराचार्य 28 जनवरी तक अपने शिविर के बाहर धरने पर रहे। फिर वाराणसी लौट आए। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश की थी। प्रयागराज में कहा था कि पूज्य शंकराचार्य जी के चरणों में प्रणाम करता हूं। उनसे प्रार्थना करता हूं कि स्नान करें। किसी भी पूज्य संत या शंकराचार्य जी का अपमान हुआ है, तो इसकी जांच कराकर कार्रवाई करेंगे। हालांकि, केशव शंकराचार्य से मिलने नहीं पहुंचे थे। शंकराचार्य के शिष्यों-पुलिस की झड़प की तस्वीरें- अब पढ़िए सीएम ने विधानसभा में क्या कहा था- ‘हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं हो सकता’
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार, 13 फरवरी को विधानसभा में बात रखी। योगी ने कहा- हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता। कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। मैं भी नहीं। मेरा मानना है कि भारत के हर व्यक्ति को कानून को मानना चाहिए। अगर सपा के लोग उसे पूजना चाहते हैं तो पूजें। सीएम ने कहा- माघ मेले में जो मुद्दा नहीं था, उसे जानबूझकर मुद्दा बनाया गया। क्या हर व्यक्ति मुख्यमंत्री बनकर पूरे प्रदेश में घूम जाएगा? क्या कोई मंत्री का बोर्ड लगाकर घूम जाएगा? क्या कोई सपा का अध्यक्ष बनकर प्रदेश में घूम जाएगा? नहीं…। एक सिस्टम है, एक व्यवस्था है। ‘मेरे लिए भी वही कानून है, जो किसी आम व्यक्ति के लिए’
योगी ने कहा- भारत के सनातन धर्म में भी यही व्यवस्था है। सनातन धर्म में शंकराचार्य का पद सर्वोच्च और पवित्र माना जाता है। सदन की व्यवस्था देखिए, यहां भी परंपरा है। सदन नियम से संचालित होता है। माघ मेले में मौनी अमावस्या पर साढ़े 4 करोड़ लोग आए थे। सबके लिए एक व्यवस्था बनाई गई। कानून सबके लिए बराबर होता है। मेरे लिए भी वही कानून है, जो किसी आम व्यक्ति के लिए है। कोई व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं हो सकता। मेरा यह मानना है कि भारत के हर व्यक्ति को कानून मानना चाहिए।
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