जिला अस्पताल में 7 माह से 76 बेड बंद पड़े:मरम्मत की सुस्ती से गर्मियों में गहराएगा मरीजों का संकट

अलवर के जिला अस्पताल में मरम्मत कार्य की धीमी रफ्तार अब मरीजों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। अस्पताल का 60 बेड का फीमेल मेडिकल वार्ड और 16 बेड का साइकेट्री (नया सवेरा) वार्ड पिछले करीब सात महीनों से बंद पड़ा है। कुल 76 बेड बंद होने से अस्पताल की व्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा है। मार्च–अप्रैल में बढ़ सकता है संकट फिलहाल भर्ती मरीजों की संख्या सामान्य है, लेकिन मार्च–अप्रैल में मौसमी बीमारियों के बढ़ने के साथ मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा होता है। ऐसे में पहले से ही 76 बेड कम होने के कारण अस्पताल में बेड फुल होने की स्थिति जल्दी बन सकती है।गर्मियों में हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। दो साल से जारी है मरम्मत कार्य अस्पताल में मरम्मत का काम करीब दो साल से चल रहा है, जिसे राजस्थान स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (RSRDC) के माध्यम से कराया जा रहा है। वहीं ओपीडी ब्लॉक में अलवर शहरी सुधार न्यास (यूआईटी) द्वारा कराए जा रहे कार्यों की रफ्तार भी सुस्त है। अस्पताल प्रशासन कई बार संबंधित एजेंसियों को पत्र लिख चुका है, लेकिन काम में अपेक्षित तेजी नहीं आ सकी है। महिला मरीजों को सबसे अधिक परेशानी फीमेल मेडिकल वार्ड बंद होने से महिला मरीजों को खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मजबूरी में महिला मरीजों को अन्य वार्डों में शिफ्ट किया जा रहा है, जहां पर्याप्त गोपनीयता और अलग व्यवस्था नहीं मिल पा रही है। इससे मरीजों और परिजनों में नाराजगी है। मानसिक रोगियों की व्यवस्था प्रभावित अस्पताल की ऊपरी मंजिल पर स्थित 16 बेड का नया सवेरा (साइकेट्री) वार्ड भी सात महीनों से बंद है। यहां पुरुष और महिला मरीजों के लिए अलग-अलग 8-8 बेड की व्यवस्था थी। वार्ड बंद होने से मानसिक रोगियों को अन्य वार्डों में भर्ती करना पड़ रहा है, जिससे उपचार और निगरानी प्रभावित हो रही है। गौरतलब है कि बुजुर्गों के लिए संचालित रामश्रय वार्ड भी करीब छह महीने बंद रहा था, जिसे हाल ही में शुरू किया गया है। लगातार वार्ड बंद रहने से अस्पताल की व्यवस्थाएं दबाव में हैं और आने वाले महीनों में हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *