अंबाला में किसानों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। निर्माणाधीन रिंग रोड से खेतों में जाने का रास्ता देने की मांग को लेकर किसान 10 दिन से धरने पर बैठे थे। गुरुवार को पुलिस ने उनके तंबू उखाड़ दिए। कई किसानों को हिरासत में ले लिया। गुस्से में किसान अंबाला-जगाधरी नेशनल हाईवे जाने करने पहुंच गए। फिलहाल हाईवे पर भी भारी पुलिस बल तैनात है। किसानों का कहना है कि NHAI से बात भी चल रही थी। हालांकि कोई समझौता नहीं हो सका। रिंग रोड बनने से उनके खेतों को जाने का रास्ता नहीं बचेगा। बरसाती पानी की निकासी में भी दिक्कत होगी। किसान एनएचएआई से कोई आश्वासन ने मिलने के बाद मशीनों की घेराबंदी करने लगे। इसके बाद स्थिति बिगड़ गई। इसके बाद पुलिस और किसानों में झड़प शुरू हो गई। पुलिस ने किसानों को खदेड़ते हुए बसों में बैठाना शुरू कर दिया। जानिए….क्या है पूरा विवाद और झड़प की स्थिति क्यों हुई हल न होता देख किसानों ने मशीनें घेरी
कई दिनों से चल रहे धरने से कोई हल न होता देख गुरुवार को किसानों ने रिंग रोड निर्माण में लगी मशीनों का घेराव शुरू कर दिया। मामला बिगड़ता देख एनएचएआई ने अंबा, महेशनगर और साहा थानों से पुलिस बुला ली गई। इसके बाद पुलिस किसानों को खदेड़ना शुरू कर दिया। कुछ किसानों को बस में बैठा लिया। जिससे मामला और बिगड़ गया। इसके बाद किसान नेशनल हाईवे की ओर कूच करने लगे। NHAI ने काम शुरू करवाया
किसानों का धरना उखाड़ने के बाद NHAI ने यहां तेजी से काम शुरू करवा दिया। जनवरी के दूसरे सप्ताह में किसानों ने रिंग रोड का काम रुकवा दिया था। अधिकारी लगातार प्रयास कर रहे थे कि धरना खत्म हो। रिंग रोड को समय पर पूरा करने का दबाव है। जाम करने को किसान हाईवे पर पहुंचे
जैसे ही पुलिस ने किसानों के तंबू उखाड़े। किसानों ने सोशल मीडिया पर अपील कर और किसानों को जुटने का आह्वान किया। शाम 4 बजे काफी संख्या में किसान अंबाला-जगाधरी नेशनल हाईवे पर पहुंच गए। भारतीय किसान यूनियन चढूनी ग्रुप ने भी मंगलवार को महापंचायत की घोषणा की थी। किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी से खुद सोशल मीडिया पर लोगों से अधिक से अधिक संख्या में पंचायत में पहुंचने की अपील की।


