भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान के लिए ड्रोग पैराशूट का क्वालिफिकेशन लेवल लोड टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा हुआ। क्वालिफिकेशन लेवल टेस्ट में अधिकतम उड़ान भार से ज्यादा लोड डालकर पैराशूट की मजबूती और सुरक्षा मार्जिन की जांच की गई। इस टेस्ट के बाद पक्का हुआ कि भारत मजबूत और बड़ी क्षमता वाले रिबन पैराशूट को डिजाइन और बनाने में पूरी तरह सक्षम है। साथ ही पैराशूट असली मिशन जैसी परिस्थितियों में भी सुरक्षित और ठीक तरह से काम करेगा। गगनयान मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाने के लिए ड्रोग पैराशूट बहुत जरूरी है। जब कैप्सूल पृथ्वी के वातावरण में लौटता है, तो यही पैराशूट उसकी तेज गति को कम करने में मदद करता है। यह टेस्ट बुधवार (18 फरवरी) को चंडीगढ़ स्थित टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) की रेल ट्रैक रॉकेट स्लेड (RTRS) सुविधा में किया गया। यह डायनेमिक टेस्ट डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) की स्पेशल हाई-स्पीड एयरोडायनेमिक और बैलिस्टिक मूल्यांकन सुविधा RTRS में पूरा हुआ। इसमें इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गनाइजेशन (ISRO) के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC), DRDO की एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ADRDE) और TBRL की टीमों ने भाग लिया।


