मशहूर सिंगर जुबिन नौटियाल ने अपनी पर्सनालिटी राइट्स की सुरक्षा को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हालांकि सुनवाई के दौरान अदालत ने उनसे सवाल किया कि जब वह उत्तराखंड के निवासी हैं, तो उन्होंने स्थानीय अदालत में याचिका दाखिल करने के बजाय दिल्ली हाई कोर्ट का रुख क्यों किया। जुबिन ने अपनी याचिका में कहा है कि कुछ कंपनियां और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उनकी अनुमति के बिना उनके नाम, फोटो, आवाज और पहचान का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका कहना है कि इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उनकी छवि का दुरुपयोग किया जा रहा है, जिसे रोका जाना जरूरी है। इसी के तहत उन्होंने अदालत से अपने पर्सनालिटी राइट्स की सुरक्षा की मांग की। हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक सुनवाई के दौरान कोर्ट ने क्षेत्राधिकार (टेरिटोरियल जूरिस्डिक्शन) का मुद्दा उठाया। अदालत ने पूछा कि जब कथित उल्लंघन उत्तराखंड से जुड़ा है और वह वहीं रहते हैं, तो मामला स्थानीय कोर्ट में क्यों नहीं दायर किया गया। जज ने यह भी टिप्पणी की कि उत्तराखंड की अदालतें बंद नहीं हैं और वहां भी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया जा सकता है। अदालत ने यह भी पूछा कि क्या केवल इस आधार पर दिल्ली में याचिका दायर की गई कि कुछ केंद्रीय मंत्रालय या टेक कंपनियों के दफ्तर यहां हैं। जुबिन की ओर से दलील दी गई कि इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय जैसे विभाग दिल्ली में स्थित हैं, इसलिए यहां मामला लाना उचित है। हालांकि कोर्ट ने इस तर्क पर संतोष नहीं जताया और स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर दिल्ली हाई कोर्ट का रुख करना पर्याप्त कारण नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि पहले दिए गए अंतरिम आदेशों को स्वतः कानूनी मिसाल नहीं माना जा सकता। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय में कई चर्चित हस्तियां भी अपने पर्सनालिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच चुकी हैं। इनमें अमिताभ बच्चन, अनिल कपूर, सलमान खान, ऐश्वर्या राय बच्चन, जैकी श्रॉफ, जूनियर एनटीआर, कुमार सानू, नागार्जुन, दलेर मेहंदी और करण जौहर जैसे नाम शामिल हैं। इन हस्तियों ने अपने नाम, चेहरे या आवाज के कथित दुरुपयोग, खासकर एआई जनरेटेड कंटेंट और डीपफेक वीडियो के मामलों में राहत मांगी थी। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में दिए गए अंतरिम आदेश अपने आप में स्थायी कानूनी नजीर नहीं बनते। बता दें कि पर्सनालिटी राइट्स का अर्थ है कि किसी व्यक्ति की पहचान, जैसे नाम, फोटो, आवाज, हस्ताक्षर या व्यक्तित्व का व्यावसायिक या अन्य उपयोग उसकी अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता। अगर ऐसा होता है, तो संबंधित व्यक्ति अदालत की शरण ले सकता है। फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट ने जुबिन नौटियाल की याचिका पर विचार जारी रखा है और साथ ही यह स्पष्ट संकेत दिया है कि अदालत यह देखेगी कि मामला किस क्षेत्राधिकार में दायर होना चाहिए। यह सुनवाई भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा तय कर सकती है।


