बोल-सुन नहीं सकते आकाश और मुस्कान बने जीवनसाथी:शादी की रस्में समझाने के लिए आई विशेष ट्रांसलेटर; हल्दी-संगीत में 100 डेफ बच्चे हुए शामिल

जयपुर में बोल और सुन नहीं सकने वाले कपल की प्रेम कहानी सोशल मीडिया से शुरू होकर शादी के बंधन में बंध गई। मानसरोवर निवासी आकाश (27) और धौलपुर की मुस्कान न सुन सकते हैं और न बोल सकते हैं। परंतु उनकी मोहब्बत शब्दों की मोहताज नहीं रही। आंखों और इशारों से ही उन्होंने एक-दूसरे की भावनाओं को समझा। दोनों 19 फरवरी को विवाह बंधन में बंध गए। वहीं शादी की रस्मों को समझाने के लिए विशेष ट्रांसलेटर (सांकेतिक भाषा) को बुलाया गया था। इसके अलावा देशभर से 100 से अधिक डेफ बच्चे और युवा भी शादी के हल्दी और संगीत समारोह में शामिल हुए। सोशल मीडिया से शुरू हुआ सफर
आकाश और मुस्कान की पहचान एक परिचित के जरिए हुई थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर बातचीत शुरू हुई। धीरे-धीरे दोस्ती गहरी होती चली गई। वीडियो कॉल और इशारों की भाषा के जरिए दोनों एक-दूसरे को समझने लगे। करीब एक साल की दोस्ती के बाद यह रिश्ता प्यार में बदला और फिर शादी तक पहुंचा। दोस्ती से शादी तक का खूबसूरत सफर
करीब एक साल की दोस्ती के दौरान दोनों ने एक-दूसरे की सोच, पसंद-नापसंद और जीवन के लक्ष्य को समझा। आकाश इशारों में बताते हैं कि उनकी बॉन्डिंग की सबसे बड़ी ताकत गहरी दोस्ती है, जबकि मुस्कान की हंसी उनका हर गुस्सा मिटा देती है। शादी से पहले दोनों ने प्री-वेडिंग शूट भी कराया और डांस की प्रैक्टिस भी की। परिवार का मिला साथ
आकाश के पिता बाबूलाल गुप्ता टेलीकॉम व्यवसायी हैं। उन्होंने बताया- बेटे की विशेष जरूरतों के बावजूद परिवार ने कभी हार नहीं मानी और उसे बेहतर शिक्षा व प्रशिक्षण दिलवाया। वहीं मुस्कान के परिवार ने भी विचार-विमर्श के बाद इस रिश्ते को स्वीकार किया। उनके परिवार में माता-पिता और दो बड़े भाई-बहन हैं। ट्रांसलेटर ने समझाई रस्में
शादी की रस्मों को समझाने के लिए विशेष ट्रांसलेटर (सांकेतिक भाषा दुभाषिया) दीक्षिका सैनी को बुलाया गया था। उन्होंने दोनों को हर रस्म को इशारों में समझाया। वहीं शादी समारोह में देशभर से 100 से अधिक डेफ बच्चे और युवा शामिल हुए। हल्दी, मेहंदी और संगीत जैसी सभी रस्में पारंपरिक तरीके से निभाई गईं। भले ही आकाश और मुस्कान संगीत की आवाज नहीं सुन सकते, लेकिन वे ताल और कंपन को महसूस कर समारोह का आनंद लेते रहे। बैडमिंटन खिलाड़ी आकाश की सादगी ने जीता दिल
आकाश पोस्ट ग्रेजुएशन तक पढ़े हुए हैं। वे डेफ स्टूडेंट्स को पढ़ाते हैं। वे अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी भी हैं और मलेशिया में आयोजित एशिया पैसिफिक डेफ बैडमिंटन टूर्नामेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुके हैं। मलेशिया में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके आकाश की सादगी और आत्मविश्वास ने मुस्कान का दिल जीत लिया। कैनवास पर बिखेरती हैं प्यार के रंग
मुस्कान मूल रूप से धौलपुर जिले की बाड़ी की रहने वाली हैं। वर्तमान में वे जयपुर के जनता कॉलोनी क्षेत्र में परिवार के साथ रहती हैं। मुस्कान को पेंटिंग का शौक है। उन्होंने अपनी भावनाओं को कैनवास पर उतारकर आकाश के सामने अपने प्यार का इजहार किया। जहां शब्द नहीं पहुंच पाते, वहां उनकी कला ने उनके दिल की बात कह दी।

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