डुमरी में की साप्ताहिक शिवगुरु परिचर्चा, गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को पुनर्जीवित करने का संदेश दिया

भास्कर न्यूज|डुमरी डुमरी में साप्ताहिक शिवगुरु परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ग्राम की महिलाओं ने बड़ी संख्या में एकत्रित होकर गुरुभजन तथा गुरु परिचर्चा के माध्यम से समाज में गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को पुनर्जीवित करने का संदेश दिया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलित कर गुरुवंदना के साथ की गई, जिसके पश्चात उपस्थित गुरु भाई बहनों ने गुरु भजनों का सामूहिक गायन किया। जिससे वातावरण पूरी तरह शिवमय हो उठा और सभी ने एक स्वर में शिवगुरु का स्मरण कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। परिचर्चा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि गुरु केवल ज्ञान देने वाले नहीं होते, बल्कि वे जीवन को सही दिशा देने वाले मार्गदर्शक भी होते हैं। गुरु-शिष्य संबंध भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जिसे बनाए रखना प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। वहीं परिचर्चा में शिवगुरु से जुड़ने के 3 प्रमुख सूत्र-दया, चर्चा और नमन को जीवन में उतारने का आह्वान किया गया। बताया गया की। दया मांगना-मन ही मन शिवगुरु से दया की याचना करना है। दूसरों के साथ शिवगुरु की चर्चा करना-चर्चा का अर्थ केवल बोलना नहीं, बल्कि सत्य और शिवतत्व पर विचार करना है। नमन करना-नमन, समर्पण और विनम्रता से शिष्यत्व का भाव जागृत होता है। नमन को अहंकार त्याग का प्रतीक भी बताया गया।

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