भास्कर न्यूज | कोंडागांव मर्दापाल ब्लॉक में सोनाबाल संकुल के प्राथमिक शाला खुटपारा में प्रधान अध्यापक हितेंद्र कुमार श्रीवास विगत कई वर्षों से प्रिंटरीच वातावरण का निर्माण कर शिक्षा को प्रभावी, रोचक और बाल-सुलभ बनाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रिंटरीच वातावरण वह शिक्षण पद्धति है, जिसमें कक्षा-कक्ष और विद्यालय परिसर को अक्षर, शब्द, चित्र, चार्ट, संख्या, गणितीय सूत्र, पर्यावरण संबंधी जानकारी से सुसज्जित किया जाता है। खुटपारा विद्यालय में केवल कक्षा-कक्ष ही नहीं, बल्कि बाहरी परिसर की दीवारों, बरामदों और खेल क्षेत्र तक को शिक्षण सामग्री से सजाया गया है।
विद्यालय में प्रिंटरीच सामग्री को इस प्रकार विकसित किया गया है कि बच्चे खेल-खेल में सीख सकें। लघु अवकाश और दीर्घ अवकाश के समय भी विद्यार्थी दीवारों पर अंकित वर्णमाला, पहाड़े, सामान्य ज्ञान और चित्रों को पढ़ते-समझते दिखाई देते हैं। यह पद्धति बाल-सुलभ और सहज शिक्षण की श्रेणी में आती है, जिससे बच्चों में सीखने के प्रति स्वाभाविक रुचि विकसित होती है। इस नवाचार के त्वरित और स्पष्ट परिणाम भी सामने आए हैं विद्यार्थियों की उपस्थिति प्रतिशत में वृद्धि, पढ़ाई के प्रति अभिरुचि में बढ़ोतरी, शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार, कक्षा में सक्रिय सहभागिता। विद्यालय प्रबंधन द्वारा निरंतर प्रिंटरीच वातावरण का उन्नयन किया जा रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरक उदाहरण बन रहे ग्रामीण अंचल में सीमित संसाधनों के बावजूद इस प्रकार का नवाचार यह सिद्ध करता है कि यदि शिक्षक में समर्पण और सृजनशीलता हो तो शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। शासकीय प्राथमिक शाला खुटपारा की यह पहल न केवल मर्दापाल ब्लाक बल्कि पूरे कोंडागांव जिले के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है।


