भास्कर न्यूज | हतबंध शिव रटे संकट कटे के जयकारों से नगर भक्तिमय हो उठा। शिव महापुराण कथा के छठवें दिवस पर सुप्रसिद्ध भगवताचार्य पंडित प्रदीप चौबे ने गणेश व कार्तिक स्वामी की बाल लीलाओं का मार्मिक वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि माता-पिता परमात्मा के समान पूजनीय है और उनके चरण ही समस्त तीर्थों के समान हैं। भगवान गणेश ने माता पार्वती की परिक्रमा कर पृथ्वी परिक्रमा का फल प्राप्त किया और माता-पिता की आज्ञा का पालन कर प्रथम पूज्य बने। वहीं कार्तिक स्वामी ने माता-पिता के आशीर्वाद से तारकासुर का वध कर देवताओं के सेनापति पद को प्राप्त किया। इस प्रकार दोनों भाइयों ने माता-पिता की सेवा और पूजा से श्रेष्ठ स्थान पाया। आचार्य श्री ने कहा कि स्त्री के लिए पति और पुत्र के लिए माता-पिता ही सच्चे तीर्थ हैं, जो लोग माता-पिता को असहाय अवस्था में छोड़कर तीर्थ यात्रा करते हैं, उन्हें उसका पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। आचार्य ने महामृत्युंजय मंत्र की महिमा बताते हुए कहा कि जीवन में गंभीर संकट की स्थिति में सवा लाख महामृत्युंजय मंत्र का अनुष्ठान योग्य ब्राह्मणों से करवाकर गन्ने के रस से अभिषेक करने पर बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। कथा में द्वादश ज्योतिर्लिंगों का विस्तार से वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ और रामेश्वरम मंदिर में गंगाजल अर्पित करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। महाकालेश्वर मंदिर व भीमाशंकर मंदिर के दर्शन से शत्रु पर विजय मिलती है। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग से विषधर प्राणियों का भय दूर होता है, जबकि सोमनाथ मंदिर के दर्शन से आरोग्यता की प्राप्ति होती है। ओंकारेश्वर मंदिर, केदारनाथ मंदिर व त्र्यंबकेश्वर मंदिर के दर्शन से शिवसायुज्य की प्राप्ति होती है और घृष्णेश्वर मंदिर के दर्शन से संतान की रक्षा होती है। उन्होंने कहा कि जो श्रद्धालु साधनों के अभाव में इन ज्योतिर्लिंगों के दर्शन नहीं कर पाते, वे सुबह शाम ध्यान-स्मरण कर भी शिव कृपा प्राप्त कर सकते हैं।


