जीवन विद्या व्याव​हारिक दर्शन है: प्राचार्य

भास्कर न्यूज | बेमेतरा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) में डीएलएड प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के छात्राध्यापकों के लिए चेतना विकास मूल्य शिक्षा विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण के चौथे दिवस विभिन्न वक्ताओं ने जीवन विद्या, मानवीय मूल्यों और सार्वभौमिक व्यवस्था पर विस्तार से विचार रखे। प्राचार्य जेके घृतलहरे ने कहा कि जीवन विद्या प्रशिक्षण एक व्यावहारिक दर्शन है, जो सांसारिक एवं मनो-आध्यात्मिक जीवन में सामंजस्य स्थापित कर मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सफलता की राह दिखाता है। यह तर्कसंगत एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जीवन को सुखी, तनावमुक्त और सुसंस्कृत बनाने का मार्ग प्रशस्त करता है। इससे सकारात्मक सोच और दूसरों के प्रति सम्मान की भावना विकसित होती है। प्रशिक्षण में मानव तीर्थ किरितपुर से राम मिलन यादव सहित डाइट के वरिष्ठ सहायक प्राध्यापक देवी प्रसाद चंदेश्वर, प्रहलाद कुमार टिकरिया, अनिल कुमार सोनी, जीएल खुटियारे, श्रद्धा तिवारी, कीर्ति घृतलहरे, अमिंदर भारतीय एवं डीएलएड के छात्राध्यापक उपस्थित रहे। प्रशिक्षण व्यक्ति की सोच को संतुलित बनाता है : प्रशिक्षण प्रभारी व्याख्याता थलज कुमार साहू ने कहा कि यह प्रशिक्षण व्यक्ति की सोच को रचनात्मक और संतुलित बनाता है। मनुष्य का समस्त प्रयास सुख की प्राप्ति के लिए होता है। किसी भी वस्तु का प्रयोजन सार्वभौमिक ही होता है प्रबोधक मृदु महाजन पोगुला ने कहा कि किसी भी वस्तु का प्रयोजन सार्वभौमिक होता है और स्थान-काल के अनुसार नहीं बदलता। स्पष्टता के साथ निर्णय लेना ही सही जीवन का आधार है। उन्होंने परिवार व्यवस्था में विश्वास, सम्मान, स्नेह, ममता, कृतज्ञता और प्रेम जैसे व्यवहार मूल्यों को आवश्यक बताया। डॉ. अवधेश पटेल ने कहा कि प्रकृति का नियम सार्वभौमिक है और कहीं भी नहीं बदलता। जहां समझ है, वहां गलती नहीं, सही एक होता है, गलती अनेक जैसे उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने बताया।

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