श्रीमद्भागवत कथा सुनना मात्र नहीं, बल्कि उसे जीवन में उतारना ही वास्तविक ज्ञान यज्ञ है

भास्कर न्यूज | लुधियाना बीआरएस नगर स्थित दुर्गा माता मंदिर में पिछले सात दिनों से चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य समापन हुआ। वृंदावन से पधारे प्रख्यात भागवतोपासक संत गोपराम महाराज ने व्यास पीठ से अंतिम दिन सुदामा चरित्र और श्री सुखदेव जी की विदाई के प्रसंग सुनाकर भक्तों को भाव-विभोर कर दिया। कथा के समापन पर विशेष हवन यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें आहुतियां डालकर विश्व कल्याण की कामना की गई। इसके उपरांत विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। कथा के अंतिम सत्र में महाराज ने कृष्ण-सुदामा मिलन का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भक्ति में भाव प्रधान है धन-दौलत नहीं। जब सुदामा अपने सखा कृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे तो प्रभु ने नंगे पैर दौड़कर उनका स्वागत किया। यह प्रसंग सुनकर पंडाल में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। महाराज ने बताया कि भागवत कथा केवल सुनना मात्र नहीं, बल्कि उसे जीवन में उतारना ही वास्तविक ज्ञान यज्ञ है। विदाई वेला में श्रद्धालुओं ने नम आंखों से सुखदेव जी और व्यास पीठ को नमन किया। कथा का शुभारंभ मुख्य यजमान मनमोहन अग्रवाल, गायत्री अग्रवाल, अंकुर अग्रवाल एवं निधि अग्रवाल सहित समस्त अग्रवाल परिवार द्वारा विधि-विधान से व्यास पूजन और पावन आरती के साथ किया गया। मंदिर कमेटी के सुनील शारदा, शमशेर बख्शी व अन्य वरिष्ठ सदस्यों ने विशेष रूप से उपस्थित होकर महाराज का आशीर्वाद लिया और स्मृति चिन्ह भेंट किए। सात दिनों तक चले इस दिव्य आयोजन में उमड़े जनसैलाब के लिए व्यवस्थाओं का मोर्चा सुषमा अग्रवाल, रश्मि अग्रवाल और ऋचा अग्रवाल ने बखूबी संभाला। उनके सटीक प्रबंधन के चलते दूर-दराज से आए भक्तों को बैठने और दर्शन करने में कोई असुविधा नहीं हुई। समापन पर आयोजित भंडारे में देर शाम तक भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। पूरा क्षेत्र जय श्री कृष्ण और राधे-राधे के जयघोष से गुंजायमान रहा।

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