यह मेहमान परिंदे… विदेशी पक्षियों को रास आया झालावाड़, तीन साल में चार गुना बढ़े

शिल्पा करूरिया | झालावाड़ जिले की नदियों और तालाबों का हैबिटेट प्रवासी पक्षियों को पसंद आ रहा है। इसीलिए साल-दर-साल यह मेहमान परिंदे हजारों किमी की उड़ान भर दूर देशों से छुट्टियां मनाने यहां आ रहे हैं। खास बात यह है कि पिछले तीन सालों में इस साल चार गुना ज्यादा विदेशी पक्षी झालावाड़ आए हैं। तीन साल पहले जहां 4148 विदेशी पक्षी जिले में आए थे, तो पिछले साल 9 हजार 844 प्रवासी पक्षी आए थे। इस बार हुई पक्षी गणना में जिले के 24 तालाबों पर 12 हजार 130 विदेशी पक्षियों का कलरव दिखा है। वन विभाग की ओर से 28 जनवरी से 2 फरवरी के बीच कराई गई गणना में सामने आया कि जिले के प्रमुख बांधों और जलाशयों में प्रवासी पक्षियों की सक्रिय मौजूदगी रही। विशेषज्ञों के अनुसार अनुकूल मौसम, पर्याप्त जल उपलब्धता और सुरक्षित वातावरण इस वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। साथ ही इस साल इतनी बड़ी संख्या में पक्षियों के यहां आने को वे अच्छा संकेत भी मान रहे हैं। इस वर्ष जिन प्रमुख विदेशी मेहमानों की गणना की गई, उनमें बार हेडेड गूज, ग्रेलैग गूज, नॉर्दर्न पिंटेल, कॉमन टील, गडवाल, शोवेलर, कॉमन पोचार्ड, रेड क्रेस्टेड पोचार्ड, कॉर्मोरेंट, पेलिकन, पर्पल हेरॉन, ओपन बिल स्टॉर्क, स्पूनबिल, रिवर टर्न, पाइड किंगफिशर, ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट, लिटिल ग्रेब, लेसर व्हिस्लिंग डक, इजिप्शियन वल्चर, ग्रेट एग्रेट, इंडियन कॉर्मोरेंट, ब्लैक-हेडेड आइबिस, ग्रे-हेडेड स्वामफेन, पेंटेड स्टॉर्क, रुडी शेलडक, ब्लैक ड्रोंगो, कॉमन सैंडपाइपर सहित कई प्रजातियां शामिल हैं। इस बार बतख प्रजाति में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है। सबसे अधिक बार-हेडेड गूज व रेड क्रेस्टेड पोचार्ड की दर्ज की गई। जिले के विभिन्न जलाशयों पर इस वर्ष प्रवासी पक्षियों की सर्वाधिक मौजूदगी दर्ज की गई। चौमहला के आसपास शिप्रा व चंबल नदी क्षेत्र में लगभग 3200 से अधिक परिंदे पहुंचे, जबकि कालीसिंध बांध पर करीब 2100 से ज्यादा पक्षियों की गणना की गई। डग-गंगधार क्षेत्र में लगभग 1800, भवानीमंडी क्षेत्र के जलाशयों में करीब 1500, पिड़ावा क्षेत्र में लगभग 1200 से अधिक प्रवासी पक्षी आए हैं। झालरापाटन के आसपास तालाबों में करीब 900 पक्षियों की उपस्थिति रही, जबकि अन्य छोटे जल स्रोतों पर शेष संख्या दर्ज की गई। पिछले वर्ष इन्हीं जलाशयों पर कुल 9844 प्रवासी पक्षी आए थे, जबकि इस बार आंकड़ा 12 हजार के पार पहुंच गया है। इस बार झालावाड़ जिले में 85 प्रजातियों के प्रवासी पक्षी आए हैं। झालावाड़ के नजदीक ही बड़बेला तालाब को विदेशी पक्षियों के लिए संरक्षित किया गया है। यहां कई प्वाइंट बनाए गए हैं, जहां लोग कैमरों में इन पक्षियों की अठखेलियां कैद करते हैं। एसीएफ संजय शर्मा का कहना है कि प्रवासी पक्षी बढ़ना यहां सुरक्षित हैबिटेट की ओर इशारा करता है। ^प्रवासी पक्षी जिले में लगातार बड़ी संख्या में आने लगे हैं, जो एक अच्छा संकेत है। इसी को देखते हुए हम बड़बेला तालाब को रामसर साइट घोषित करवाने के लिए प्रस्ताव भेज रहे हैं। – सागर पंवार, डीसीएफ, झालावाड़

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