भास्कर न्यूज | जालंधर भोगपुर चीनी मिल के कॉम्प्लेक्स के अंदर स्थापित किए जा रहे बायो सीएनजी प्लांट का विरोध जारी है। सरकारी चीनी मिल में 2023 में प्लांट को मंजूरी दी गई थी। सॉलिड वेस्ट से ये प्लांट कंप्रेस्ड गैस पैदा करेगा। लेकिन लोग 2024 से ही इस प्लांट का विरोध कर रहे हैं। वीरवार को प्लांट का निर्माण बंद करने को लेकर सुबह 6 बजे जनता कि विरोध शुरू हुआ। जो कि शाम 6 बजे तक जारी रहा। इस दौरान रोष स्वरूप भोगपुर बंद की घोषणा की गई। प्लांट के विरोध में तमाम बाजार बंद रहे। इस दौरान लोगों ने प्लांट को जाने वाली रोड पर बैठकर धरना दिया। इस धरने के कारण प्लांट से बाहर आए ट्रक भी फंसे रहे हैं। भारी पुलिस फोर्स तैनात रखी गई। लोगों ने अब 5 मार्च तक का समय दिया है। एसडीएम विवेक मोदी व पुलिस अफसरों ने लोगों को शांत किया है। धरने में व्यापारी, किसान व इलाका निवासी शामिल रहे। वीरवार को घटनाक्रम भोगपुर नगर कौंसिल प्रधान राजा व पुलिस फोर्स के बीच बहसबाजी से शुरू हुआ। सुबह 9 बजे तक भोगपुर के हर इलाके से लोग धरने में आ चुके थे। धरने में इलाका विधायक सुखविंदर कोटली ने कहा कि पंजाब सरकार जनता की बजाय प्लांट के पक्ष में खड़ी है। जब इलाके के तमाम लोग प्लांट को लेकर सेहत की चिंता कर रहे हैं तो बावजूद प्लांट का निर्माण जारी रखना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर रहा है। उधर, भारी पुलिस फोर्स ने धरना कारियों को घेरकर रखा ताकि कोई नेशनल हाईवे न जाम कर दे। लोग प्लांट की रोड पर डटे रहे। महिलाएं लगातार नामजाप करती रहीं। मौके पर धरना कारियों ने लंगर लगाया। कई लोग पक्के मोर्चे तक की अपीलें कर रहे थे। शाम 6 बजे माहौल शांत हुआ। लोग लगातार प्लांट का काम बंद रखने की बात को पुखता बनाने के लिए मानीटरिंग करेंगे। धरने में इलाके के गणमान्य लोगों में विशाल भनोट, लखविंदर सिंह लक्की, रोबिन अरोड़ा, सोनू अरोड़ा सहित तमाम लोग शामिल रहे। प्लांट के विरोध में आंदोलन कर रहे व्यापारी, किसान व इलाकावासी। भोगपुर सीएनजी प्लांट के विरोध के 3 कारण {भोगपुर निवासियों की चिंता है कि भोगपुर चीनी मिल लोगों की आबादी के बीच है। इस प्लांट के अंदर सीएनजी प्लांट लगाया जा रहा है। हवा और पानी प्रदूषित होगा। इसका जनता की सेहत पर असर होगा। {लोगों को अंदेशा है अ सॉलिड वेस्ट लाकर प्लांट में प्रोसेस होगा। इसी से गैस बनेगी। कूड़े की ढुलाई की गाड़ियां परेशानी पैदा करेंगी। {भोगपुर की चीनी मिल के लिए जनता ने जमीन दी थी। जो जमीन पर गन्ने की बिजाई करके इसके ऊपर िरसर्च करने के लिए लेकिन ये जमीन प्राइवेट कंपनी को सरकार ने दी है।


