सरकार की ओर से 10 मिनट में डिलीवरी के दबाव को लेकर आपत्ति और सख्त संदेश दिए जाने के बाद भी रायपुर की सड़कों पर हालात नहीं बदले हैं। क्विक कॉमर्स कंपनियों की मिनटों में सामान पहुंचाने की होड़ का सीधा असर डिलीवरी पार्टनर्स की ड्राइविंग पर दिख रहा है। तय समय में ऑर्डर पहुंचाने के दबाव में डिलीवरी बॉय बिना हेलमेट, रॉन्ग साइड और तेज रफ्तार में बाइक दौड़ाते हुए कट मारकर डिलीवरी करने को मजबूर हैं। भास्कर की टीम ने (ब्लिंकिट) Blinkit के एक स्टोर से निकलने वाले दो डिलीवरी बॉय का पीछा किया। स्टोर से निकलते ही दोनों ने ट्रैफिक नियमों की अनदेखी शुरू कर दी। कहीं रॉन्ग साइड बाइक दौड़ाई गई, तो कहीं भीड़भाड़ वाले चौराहों पर बिना रुके कट मारते हुए निकल गए। मकसद सिर्फ एक था-जितनी जल्दी हो सके सामान ग्राहक तक पहुंचाना। पड़ताल के दौरान यह भी सामने आया कि कई डिलीवरी बॉय हेलमेट नहीं पहने थे। रेड सिग्नल पर रुकने के बजाय वे खाली जगह देखते ही बाइक निकाल लेते हैं। संकरी गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक तेज रफ्तार में बाइक दौड़ाने से राहगीरों और अन्य वाहन चालकों की जान हर पल खतरे में नजर आई। रोक-कार्रवाई और सख्ती की चेतावनी के बाद सभी इंस्टेंट स्टोर वालों ने अपनी कंपनी की टी-शर्ट पहनना भी बंद कर दिया है। टीम ने 10 से ज्यादा रास्तों पर डिलीवरी बॉय का पीछा कर जानी पूरी हकीकत रोक फिर भी 8-10 मिनट में डिलीवरी का वादा
रोक के बाद भी कंपनियां एप पर 8-10 मिनट में डिलीवरी का दावा कर रही है। ब्लिंकिट के अलावा अपना मार्ट और स्विगी इंस्टामार्ट जैसी कंपनियां कहीं 8 मिनट, कहीं 10 मिनट तो कहीं 15 मिनट में ग्रॉसरी आदि सामान डिलीवरी का वादा कर रही हैं। भास्कर ने तीनों संस्थानों से सामान ऑनलाइन मंगवाकर भी देखा। तीनों टाइम से पहले ही पहुंच गई। अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो ‘फास्ट डिलीवरी’ की यह रेस किसी बड़े हादसे की वजह बन सकती है। कंपनी का टी-शर्ट नहीं
दोपहर 12 बजे ब्लिंकिट स्टोर एक्सप्रेस वे से डिलीवरी बॉय ब्लिंकिट में एक थैले में सामान लेकर निकला। पहले ही उसने रॉन्ग साइड ले लिया। इसके बाद पंडरी रोड में भी रॉन्ग साइड जाते हुए वह खालसा स्कूल के पास से होते हुए आगे बढ़ा। उसने न तो कंपनी की टी-शर्ट पहनी थी, ना ही उसने हेलमेट पहना था। कवर्धा सदन-जेल रोड होते हुए वह होटल महिंद्रा पहुंचा। उसने सिर्फ 4 मिनट में ही सामान को पहुंचा दिया। कट मारकर निकल गया
दोपहर 12.30 बजे ब्लिंकिट स्टोर एक्सप्रेस से डिलीवरी बॉय सामान लेकर निकला। उसने न तो हेलमेट पहना था, न ही कंपनी की टी-शर्ट पहनी थी। उसने भी रॉन्ग साइड लिया। पंडरी रोड पर दो गाड़ियों के बीच कट मारते हुए स्पीड से निकालते हुए एलआईसी ऑफिस के बगल से सिटी मॉल रोड पहुंचा। रॉन्ग साइड से देवेंद्र नगर में स्पीड से आगे बढ़ा। उसका पीछा करते भास्कर की टीम भी पीछे हो गई। 3 मिनट में वह सेक्टर 5 के मर्लिन जयश्री विहार पहुंचा।
कंपनियों का दबाव या सिस्टम की मजबूरी?
नाम न बताने की शर्त पर डिलीवरी पार्टनर्स ने बताया कि तय समय में ऑर्डर न पहुंचाने पर रेटिंग गिरने और पेनाल्टी का डर रहता है। एप पर ऑर्डर करते ही जो टाइम दिखाया जाता है, उसी टाइम या उससे पहले उन्हें सामान पहुंचाना होता है। यदि टाइम ज्यादा लग जाए तो ग्राहक रेटिंग गिरा देते हैं। उसके बाद कंपनी भी हम पर पेनाल्टी लगाती है। यही वजह है कि हम जोखिम उठाने को मजबूर हैं। भास्कर एक्सपर्ट – प्रफुल्ल जोशी, ट्रैफिक एक्सपर्ट खतरे में डाल रहे जान
हर कोई चाहता है कि उसे घर बैठे ही सारा सामान मिल जाए। इसके चलते इन कंपनियों की संख्या भी बढ़ गई है। लेकिन कंपनियों को अपने स्टाफ के लिए सोचना चाहिए। मिनटों में डिलिवरी के चक्कर में उनके स्टाफ खुद और दूसरों की जान को खतरे में डाल रहे हैं तो यह सही नहीं हैं। प्रतिस्पर्धा में ऐसा नहीं करना चाहिए जिससे किसी के हादसे की आशंका हो। ई-कॉमर्स कंपनियों को सुप्रीम कोर्ट की दी गई गाइडलाइन का पालन करना चाहिए।


