जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाला मामले में रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल तीसरे दिन भी नहीं मिले। एसीबी ने गुरुवार को भी दिल्ली में 5 जगह छापे मारे, लेकिन कहीं पुख्ता जानकारी नहीं मिली। इधर, मामले में पकड़े गए 3 चीफ इंजीनियरों सहित 10 आरोपियों से गुरुवार को एसआईटी अधिकारियों ने 8 घंटे तक पूछताछ की। एसीबी ने आरोपियों से फर्जी दस्तावेज और कमीशन के संबंध में सवाल पूछे। ऐसे में विभाग के कई अधिकारियों-इंजीनियरों के नाम सामने आए हैं। फर्जी सर्टिफिकेट के लिए मुकेश ने लिए थे 15 लाख : जांच में सामने आया है कि बिलासपुर से पकड़े गए मुकेश पाठक ने फर्जी सर्टिफिकेट बनाने के लिए महेश मित्तल से 15 लाख रुपए लिए थे। इसकी बैंक स्टेटमेंट की जांच में पुष्टि हो गई। दूसरी ओर, डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह ने बताया कि मामले में फरार अधीक्षण अभियन्ता जितेन्द्र शर्मा व तत्कालीन एसई मुकेश गोयल का भी लुक आउट नोटिस जारी हुआ है। एक अन्य का पासपोर्ट नहीं बना हुआ है। रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल के खिलाफ बुधवार को ही लुक आउट नोटिस हो चुका है। मंत्री ने फाइल तलब की : वहीं, घोटाले में गिरफ्तार इंजीनियरों को जलदाय विभाग सस्पेंड करेगा। जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र से ठेके देने और घोटाला करने के आरोपी इंजीनियरों की फाइल तलब की है और सस्पेंड करने के निर्देश दिए हैं। शेष | पेज 6 एसीबी की एसआईटी ने 979 करोड़ के जेजेएम घोटाले में अब तक जलदाय विभाग के चीफ इंजीनियर (प्रशासन) दिनेश गोयल, केडी गुप्ता, एडिशनल चीफ इंजीनियर शुभांशु दीक्षित, वित्तीय सलाहकार सुशील शर्मा, सीई निरिल कुमार, एक्सईएन विशाल सक्सेना, रिटायर्ड एसीई अरुण श्रीवास्तव, डीके गौड़ और रिटायर्ड एसई महेंद्र सोनी को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं कई इंजीनियरों ने पहले ही मामले पर हाईकोर्ट से स्टे ले लिया है। जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति से काम कर रही है। पूर्व कांग्रेस सरकार के समय जेजेएम के घोटालों की जांच की गई। जांच के बाद आरोपी अधिकारियों के खिलाफ एसीबी में मामला दर्ज होने के बाद गिरफ्तारियां हुई है। इधर, गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने कहा कि सरकार को किसी भी विभाग में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार की सूचना मिलती है, वहां संबंधित एजेंसियों द्वारा तुरंत और सख्त कार्रवाई की जाती है। किसी भी स्तर पर यदि भ्रष्टाचार पाया जाता है तो उसकी परतें खोली जाएंगी और दोषियों को जेल भेजा जाएगा। FIR रद्द करवाने हाईकोर्ट पहुंचे सुबोध अग्रवाल
एसीबी में 30 अक्टूबर 24 को दर्ज हुई एफआईआर को रद्द करवाने के लिए जलदाय विभाग के मुखिया रहे रिटायर आईएएस सुबोध अग्रवाल ने हाईकोर्ट में गुरुवार को आपराधिक याचिका दायर की है। इसमें कहा कि जो एफआईआर उनके खिलाफ दर्ज हुई है वह बिना विस्तृत जांच के दर्ज हुई है। याचिका पर आगामी दिनों में हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। एडवोकेट दीपक चौहान ने बताया कि सुबोध अग्रवाल का पीएचईडी में कार्यकाल 18 अप्रैल 2022 से शुरू हुआ था। उनके कार्यकाल से पहले ही तत्कालीन एसीएस आईएएस अफसर के कार्यकाल में ही गणपति ट्यूबवैल व श्याम ट्यूबवैल ने इरकॉन के फर्जी प्रमाण पत्र पेश कर विभाग से अरबों के टेंडर लिए थे। जिस 900 करोड़ के टेंडर संबंधी घोटाले की एफआईआर दर्ज की है, उसमें से केवल 10% से भी कम मूल्य के टेंडरों की सूची प्रार्थी ने दी थी। लेकिन फिर भी एसीबी ने इस बारे में कोई भी जांच नहीं की। याचिका में कहा कि सुबोध अग्रवाल की अध्यक्षता में गठित फाइनेंस कमेटी द्वारा स्वीकृत किए गए टेंडरों में से एक भी पैसा गणपति ट्यूबवेल या श्याम ट्यूबवेल को नहीं दिया है। वहीं, सुबोध अग्रवाल के सामने इरकॉन का ईमेल आया तो उन्होंने जल्द ही एक निष्पक्ष उच्च स्तरीय समिति गठित की। इस समिति ने निष्कर्ष दिया कि श्याम ट्यूबवेल और गणपति ट्यूबवेल द्वारा जल जीवन मिशन के तहत टेंडर प्राप्त करने के लिए इरकॉन इंटरनेशनल के फर्जी प्रमाण पत्र, सुबोध अग्रवाल के कार्यकाल से पहले ही पेश किए गए थे। इस समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही मामले में उनके कार्यकाल में श्याम ट्यूबवेल, गणपति ट्यूबवेल सहित अधिकारी विशाल सक्सेना के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई। साथ ही, श्याम ट्यूबवेल और गणपति ट्यूबवेल को दिए सभी टेंडर निरस्त कर दिए गए और उन्हें ब्लैकलिस्ट किया गया।


