प्रदेश के दो बड़े बाघ अभयारण्यों रणथंभौर और सरिस्का में सुरक्षा उपायों में खामियों की वजह से 14 बाघों की मौत हो गई। इनमें चार बाघों का शिकार किया गया। वहीं, दस बाघ क्षेत्रीय संघर्ष में मारे गए। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की गुरुवार को विधानसभा में रखी गई रिपोर्ट में खुलासा किया गया है। कहा गया है कि सुरक्षा उपाय करके इन मौतों को रोका भी जा सकता था। कैग की वर्ष 2016-2023 तक की लेखापरीक्षा रिपोर्ट में आवंटित बजट को खर्च नहीं करने, अवैध खनन, पदों की रिक्तियों और व्यस्थाओं को लेकर वन विभाग के अधिकारियों पर बड़े सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में यहां तक कहा गया है कि वन क्षेत्र की सुरक्षा में लगे अफसर एवं कार्मिकों के पचास प्रतिशत से अधिक पद खाली हैं। इनमें अकेले वन रक्षक के 65 प्रतिशत हैं। और तो और विभाग सरकार एवं विभिन्न स्रोतों से आवंटित बजट 539 करोड़ रुपए में से 195 करोड़ रुपए तो खर्च भी नहीं कर सका। कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्यों में राजस्थान में बाघ अभयारण्यों के प्रबंधन पर एक लेखा परीक्षा की गई। प्रदेश में 32 हजार 921 वर्ग किलोमीटर वन भूमि है। इसमें 13 हजार 350 वर्ग किलोमीटर अधिसूचित संरक्षित क्षेत्र शामिल हैं। तीन राष्ट्रीय उद्यान, तीन बाघ अभयारण्य, 27 अभयारण्य और 14 संरक्षण रिजर्व भी है। इसमें तीन बाघ अभयारण्य रणथंभौर, सरिस्का और मुकुंदरा हिल्स है। इसके बाद दो अतिरिक्त संरक्षण मई, 2022 में रामगढ़ विषधारी और अक्टूबर, 2023 में करौली-धौलपुर को अधिसूचित किया गया। तीनों बाघ अभयारण्य में कुल बाघों की संख्या वर्ष 2016 में 76 से बढ़कर 2023 में 110 हो गई। इसके अलावा नौ बाघों की मृत्यु बीमारी से हुई। वर्ष 2024 के जुलाई और सिंतबर के दौरान रणथंभौर में दो बाघों टी-58 और टी-2312 की मौत की सूचना पर कारणों की जांच की जा रही है। विभाग की ओर से वन्य सुरक्षा और बाघ संरक्षण के प्रयासों में महत्वपूर्ण कमियां पाई गई। विभाग वन्य जीवों के शिकार को नहीं रोक सका। जिससे चार बाघों की शिकार से मृत्यु हो गई। इसमें रणथंभौर एवं सरिस्का में दो-दो बाघ शामिल है। इसके अलावा महत्वपूर्ण बाघ कोरिडोर विशेष रुप से आरटीआर एक और दो के बीच विकसित करने में विफलता के फलस्वस्वरुप बाघों की अत्यधिक भीड़ और क्षेत्रीय संघर्ष में दस बाघों की मृत्यु हुई। इसमें रणथंभौर में नौ और सरिस्का में एक बाघ शामिल है। खराब वित्तीय प्रबंधन, अतिक्रमण और अवैध खनन बड़ा कारण 31 मार्च, 2023 तक तीनों अभयारण्यों में 640 कार्मिकों में से 295 ही कार्यरत थे। वन रक्षक के 469 में 305 पद रिक्त थे। क्षेत्रीय वन अधिकारी, वनपाल एवं सहायक वनपाल के भी 17 से 28% पद खाली थे। तीनों अभयारण्यों की 320.29 हेक्टेयर जमीन पर 253 परिवारों का अतिक्रमण पाया गया। खराब वित्तीय प्रबंधन अपर्याप्त सुरक्षा उपाय और प्रभावी मानव संसाधन प्रबंधन किया गया। बजट में 539.59 करोड़ के आवंटन के बावजूद 344.06 करोड़ रुपए का उपयोग हुआ। प्रभावी गश्त योजनाओं का अभाव रहा। पारिस्थिति संवेदनशील क्षेत्रों के संबंध में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के निर्देशों का पालन न करने से स्थिति और खराब हो गई। विशेष रुप से एसटीआर के आसपास जहां अभयारण्य के निकट खनन जारी रहा। 108 गांवों के विस्थापन में से मार्च, 2023 तक 15 गांवों को पूरी तरह से और 17 गांवों को आंशिक रूप से विस्थापित किया गया था। सुझाव : मौतें रोकने के लिए एसटीएफ का गठन हो, पुनर्वास पैकेज बेहतर बनाया जाए


