रेलवे मजदूर संघ में नियुक्तियों पर हाईकोर्ट की रोक:UPRMS जोधपुर मंडल के 3 सह-नामित पदाधिकारी फिलहाल नहीं कर सकेंगे काम

राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ ने उत्तर पश्चिम रेलवे मजदूर संघ (UPRMS) के जोधपुर मंडल में पदाधिकारियों की विवादित नियुक्तियों पर अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस कुलदीप माथुर की एकलपीठ ने विवादित नियुक्तियों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए तीन नव-मनोनीत पदाधिकारियों को फिलहाल पद का कार्यभार संभालने से रोक दिया है। अदालत ने संघ के आंतरिक संविधान के उल्लंघन के आरोपों को गंभीर मानते हुए रेलवे प्रशासन और संघ मुख्यालय को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। यह याचिका जोधपुर के मगरा पूंजला कैलाश नगर निवासी जुगल किशोर की ओर से दायर की गई है। इसी पर कोर्ट ने अगली सुनवाई तक इन सह‑नामित पदाधिकारियों को डिविजनल काउंसिल के ऑफिस‑बेयरर के रूप में काम करने पर रोक लगा दी है।​ जानें क्या है मामला… मजदूर संघ के संविधान के खिलाफ ‘को-ऑप्शन’ का आरोप याचिकाकर्ता जुगल किशोर, जो उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर डिविजन से संबद्ध हैं, ने अदालत में कहा कि UPRMS के जोधपुर डिविजन में कुछ खाली पदों पर निजी प्रतिवादी संख्या 7, 8 और 9 को नियमों के विरुद्ध सह‑नामित करके पदाधिकारी बना दिया गया है। याचिका में यूनियन के संविधान का हवाला देते हुए कहा गया कि 16 नवंबर 1996 को हुई आम सभा में स्वीकृत संविधान के क्लॉज 6(d)(iii) के अनुसार, यदि डिविजनल ऑफिस‑बेयरर के पद पर कोई रिक्ति होती है, तो उसे केवल डिविजनल काउंसिल के सदस्यों में से ही को-ऑप्शन/इलेक्शन द्वारा, उपस्थित सदस्यों के बहुमत समर्थन से भरा जा सकता है।​ जुगल किशोर का आरोप है कि मौजूदा मामले में जिन लोगों को डिविजनल ऑफिस‑बेयरर बनाया गया, वे खुद डिविजनल काउंसिल के सदस्य ही नहीं हैं, इसके बावजूद उन्हें सह‑नामित कर महत्वपूर्ण पद दे दिए गए। याचिका में इस कार्रवाई को यूनियन के संविधान का खुला उल्लंघन, मनमाना और अवैध बताया गया है।​ किन पदाधिकारियों की नियुक्ति पर उठा विवाद कोर्ट के ऑर्डर के अनुसार, UPRMS के खिलाफ दायर इस रिट में यूनियन के मुख्यालय, डिविजनल सेक्रेटरी और उत्तर पश्चिम रेलवे प्रशासन के साथ तीन सह‑नामित पदाधिकारियों को भी पक्षकार बनाया गया है। इनमें प्रतिवादी 7 ललित गर्ग (‘को-ऑप्ट’ डिविजनल सेक्रेटरी) प्रतिवादी 8 मंजू आज़ाद (‘को-ऑप्ट’ वाइस प्रेसिडेंट) और प्रतिवादी 9 दिनेश कुमार (‘को-ऑप्ट’ ज्वाइंट डिविजनल सेक्रेटरी) शामिल हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि इन तीनों को डिविजनल काउंसिल के सदस्यों में शामिल किए बिना ही सीधे सह‑नामित कर दिया गया, जिससे संविधान की उस शर्त का उल्लंघन हुआ जिसमें स्पष्ट है कि रिक्ति को केवल “काउंसिल के सदस्यों में से” ही भरा जा सकता है.​ हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश, लगाई रोक जस्टिस कुलदीप माथुर ने प्रारंभिक दलीलों को सुनने के बाद टिप्पणी की कि मामला विचारणीय है। कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था देते हुए आदेश दिया कि अगली सुनवाई की तारीख तक ये तीनों सह-चयनित पदाधिकारी उत्तर पश्चिम रेलवे मजदूर संघ की मंडल परिषद के पदाधिकारी के रूप में न तो कार्य करेंगे और न ही किसी भी कर्तव्य का निर्वहन करेंगे। रोक की जद में आए पदाधिकारियों में मंडल सचिव ललित गर्ग, मंडल उपाध्यक्ष मंजू आजाद और संयुक्त मंडल सचिव दिनेश कुमार शामिल हैं। रेलवे प्रशासन और संघ मुख्यालय से मांगा जवाब कोर्ट ने इस विवाद में रेलवे प्रशासन की भूमिका और संघ की कार्यवाही पर स्पष्टीकरण के लिए कई अधिकारियों और निकायों को नोटिस जारी किए हैं। नोटिस पाने वालों में उत्तर पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक (जयपुर), मंडल रेल प्रबंधक (जोधपुर), उप मुख्य कार्मिक अधिकारी (मुख्यालय, जयपुर) और सहायक कार्मिक अधिकारी (जोधपुर) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, संघ के जयपुर स्थित मुख्यालय और उसके महासचिव को भी मुख्य याचिका और स्थगन आवेदन पर नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।

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