कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने धरसींवा विकासखंड के दौरे के दौरान स्कूलों, मत्स्य पालन केंद्र और पशुपालन विभाग की योजनाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने स्कूल में बच्चों की पढ़ाई की स्थिति और मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता का जायजा लिया। साथ ही मछली पालन केंद्र में उत्पादन की जानकारी लीऔर कृत्रिम गर्भाधान केंद्र पहुंचकर वहां की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। कलेक्टर ने शासकीय प्राथमिक शाला कांदुल में जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरंजन के साथ मध्यान्ह भोजन का स्वाद लेकर उसकी गुणवत्ता की जांच की। उन्होंने स्कूल में चल रहे मरम्मत कार्य को शीघ्र और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। शासकीय प्राथमिक शाला सेजबहार में उन्होंने बच्चों की कॉपियां जांचीं और उनसे पढ़ाई के बारे में बातचीत की। बच्चों से पूछा कि कक्षा में क्या पढ़ाया जा रहा है और मध्यान्ह भोजन में क्या परोसा जाता है। उन्होंने अधिकारियों को शिक्षा की गुणवत्ता और बेहतर बनाने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से हर महीने 17 टन उत्पादन सेजबहार में कलेक्टर ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत चल रहे मछली पालन कार्य का निरीक्षण किया। यहां पांच नर्सरी और चार तालाबों में मछली पालन किया जा रहा है। नर्सरी में तैयार छोटे मछली बीज को तालाब में डाला जाता है। हितग्राहियों ने बताया कि इससे हर महीने करीब 17 टन मछली का उत्पादन हो रहा है। कलेक्टर ने जल संरक्षण और अधिक पौधारोपण पर ध्यान देने की बात कही। कृत्रिम गर्भाधान केंद्र का निरीक्षण कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने सेजबहार के कृत्रिम गर्भाधान उपकेंद्र का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में अब तक 1047 गाय और भैंसों का कृत्रिम गर्भाधान किया गया है, जिससे करीब 450 उच्च नस्ल के बछड़े-बछियों का जन्म हुआ है। कलेक्टर ने टीकाकरण व्यवस्था देखी और खुरहा-चपका बीमारी से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण जारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ ज्यादा से ज्यादा पशुपालकों तक पहुंचना चाहिए।


