1993 में 23 फरवरी से हुई थी रमजान की शुरुआत, 33 वर्षों बाद एक बार फिर फरवरी में रमजान का महीना

भास्कर न्यूज | गढ़वा जिला मुख्यालय सहित विभिन्न क्षेत्रों में गुरुवार को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस्लामी कैलेंडर के पाक महीने रमजान उल मुबारक का पहला रोजा अकीदत और एहतराम के साथ रखा। सुबह सहरी के बाद लोगों ने दिनभर रोजा रखकर इबादत, तिलावत-ए-कुरआन और दुआ में समय बिताया। इस अवसर पर रोजेदारों ने कहा कि रमजान का महीना सब्र, त्याग और आत्मसंयम का संदेश देता है। मगरीब की अजान के साथ ही रोजेदारों ने खजूर और पानी से रोजा खोला। इसके बाद मगरीब की नमाज अदा की। इस अवसर पर कई स्थानों पर सामूहिक इफ्तार का आयोजन भी किया गया। जहां लोगों ने आपसी भाईचारे और सौहार्द का परिचय दिया। 33 वर्षों के अंतराल के बाद इस वर्ष मुसलमानों का पवित्र महीना रमजान उल मुबारक फरवरी माह से शुरू हुआ है। इससे पूर्व वर्ष 1993 में 23 फरवरी से रमजान की शुरुआत हुई थी। इस प्रकार करीब तीन दशक बाद रमजान की आमद फरवरी में होने से इसे समय और मौसम दोनों दृष्टि से खास माना जा रहा है। इस्लामिक कैलेंडर चंद्रमा पर आधारित होता है। चांद दिखने के साथ ही नए महीने की शुरुआत होती है। इस्लामी विद्वानों के अनुसार रमजान हर वर्ष लगभग 10 से 11 दिन पहले आता है और करीब 33 वर्षों में सभी मौसमों का चक्र पूरा कर लेता है। यही कारण है कि कभी रमजान तेज गर्मी में पड़ता है तो कभी सर्दियों की हल्की ठंड में। फरवरी में रोजा पड़ने से सेहरी और इफ्तार के बीच का समय अपेक्षाकृत कम है। जिससे रोजेदारों को शारीरिक रूप से सहूलियत मिलेगी। रमजान की 21वीं, 23वीं, 27वीं और 29वीं रात का विशेष महत्व : रमजान की 21वीं, 23वीं, 27वीं और 29वीं रात का विशेष महत्व होता है। इन रातों में मुस्लिम समाज के लोग मस्जिदों में विशेष नमाज और इबादत में मशगूल रहते हैं। जबकि महिलाएं और बच्चे घरों में इबादत करते हैं। इन्हीं रातों में से एक रात शब-ए-कद्र की होती है। जिसे हजार महीनों से बेहतर माना गया है। इस रात को लेकर विशेष तैयारी और इबादत की जाती है। 1993 में रमजान 23 फरवरी से शुरू हुआ था: इतिहास पर नजर डालें तो वर्ष 1993 में रमजान 23 फरवरी से शुरू हुआ था। वर्ष 1994 में इसकी शुरुआत 12 फरवरी से हुई थी और 1995 में 1 फरवरी से रमजान आरंभ हुआ था। चांद रात से शुरू हो गई तारावीह की नमाज गढ़वा शहर के सभी मस्जिदों में रमजान की चांद रात से नमाज-ए-तरावीह शुरू हो गई है। शहर के जामा मस्जिद, इराकी मोहल्ला में पहले दिन हाफिज यूसुफ द्वारा तारावीह की नमाज अदा कराई गई। तैबा मस्जिद में हाफिज क्याम, नूरी मस्जिद में हाफिज सलीम, उंचरी मस्जिद में मौलाना युनुस, अली नगर मस्जिद में हाफिज नजीबुल्लाह, शरीफ मोहल्ला मस्जिद में हाफिज नदीम तथा टंडवा मस्जिद में हाफिज तनवीर ने तारावीह की नमाज अदा कराई। नमाज में बड़ी संख्या में रोजेदारों ने भाग लिया। रमजान को लेकर सजाई गई है मस्जिद : रमजान को लेकर शहर की मस्जिदों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। मस्जिद इंतजामिया कमेटियों द्वारा नमाजियों और रोजेदारों के लिए साफ-सफाई, रोशनी, पेयजल और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। ताकि इबादत के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो। तरावीह की नमाज अदा करते रोजेदार।

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