छत्तीसगढ़ कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के अधिकारी-कर्मचारियों की वेतन विसंगति, सेवा-लाभ बहाली और पिछले 18 महीनों से लंबित देयकों को लेकर चल रही पांच दिवसीय कामबंद हड़ताल सह धरना-प्रदर्शन का आज पांचवा दिन है। चौथे दिन कुलपति से हुई वार्ता बेनतीजा रही थी। इसके बाद छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने कड़ा रुख अपनाते हुए आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है। चौथे दिन धरना स्थल पर पहुंचकर छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने KVK कर्मचारियों से मुलाकात की। उनके नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति से मुलाकात भी की थी। लेकिन हालांकि प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि चर्चा के दौरान कुलपति की ओर से स्पष्ट समाधान देने के बजाय केवल प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं का हवाला दिया गया। जिम्मेदारी टालने और समाधान की अनिश्चितता कभी मामला राज्यपाल से जुड़ा बताया गया तो कभी वित्त विभाग और राज्य शासन का नाम लेकर जिम्मेदारी टाली गई। किसी भी मुद्दे पर ठोस और समयबद्ध समाधान सामने नहीं आया। इस पर कमल वर्मा ने साफ कहा कि यदि वास्तव में समाधान राज्यपाल स्तर से ही होना है। फेडरेशन की चेतावनी और हड़ताल का विस्तार वार्ता विफल रहने के बाद फेडरेशन ने दो टूक चेतावनी दी कि यदि जल्द कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया, तो KVK कर्मचारी सीधे राजभवन (लोकभवन) के सामने धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। इसके अलावा मौजूदा पांच दिवसीय हड़ताल को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल दिया जाएगा। ICAR के नए निर्देश से शुरू हुई परेशानी वहीं विश्वविद्यालय ने कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के अधिकारियों और कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर कहा है कि वेतन से जुड़ी विसंगतियों को दूर करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र पूरी तरह से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) से वित्त पोषित हैं। लेकिन ICAR ने 20 अगस्त 2024 को नए निर्देश जारी किए, जिसके बाद एनपीएस अंशदान, पेंशन अनुदान अन्य भत्तों में कटौती कर दी गई। अब ICAR सिर्फ मूल वेतन, महंगाई भत्ता और मकान किराया भत्ता ही दे रहा है। विश्वविद्यालय का कहना है कि भारत में कुल 731 कृषि विज्ञान केंद्र हैं। नए नियमों के बाद सभी जगह पूरे वेतन का भुगतान करना मुश्किल हो गया है। हाईकोर्ट के आदेश से पूर्ववत वेतन विश्वविद्यालय ने बताया कर्मचारियों की याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बिलासपुर ने स्थगन आदेश दिया। इसके बाद विश्वविद्यालय ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में 1.6 करोड़ रुपए अपने खाते से खर्च कर कर्मचारियों को पूरा वेतन दिया। राज्य शासन से 3.50 करोड़ की मांग विश्वविद्यालय के पास खुद की आय नहीं है। इसलिए 2025-26 में राज्य शासन से 3.50 करोड़ रुपए की मदद मांगी गई है, ताकि कर्मचारियों को समय पर वेतन मिल सके। यदि भविष्य में ICAR या राज्य शासन से पूरी राशि मिलती है, तो कर्मचारियों को पूरा वेतन और भत्ते दिए जाएंगे। सेवानिवृत्ति उम्र पर भी स्थिति साफ कृषि विज्ञान केंद्र के कर्मचारी गैर-शिक्षकीय संवर्ग में आते हैं। उनकी सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है, विश्वविद्यालय में 65 वर्ष की सेवानिवृत्ति सिर्फ शिक्षकों के लिए है इसलिए यह कहना गलत है कि KVK कर्मचारियों को जल्दी रिटायर किया जा रहा है। हड़ताल पर रोक, पढ़ाई प्रभावित होने की वजह वहीं विश्वविद्यालय परिसर में हड़ताल पर रोक लगाने के मामले में प्रशासन का कहना है कि विश्वविद्यालय में कन्या छात्रावास है और इस समय परीक्षाएं चल रही हैं। इसी कारण छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए परिसर में धरना-प्रदर्शन पर रोक लगाई गई है।


