गोदावरी सोलर प्लांट के विरोध में प्रदर्शन:ग्रामीणों के समर्थन में विधायक पहुंचे; बिना ग्रामसभा की सहमति से प्लांट स्थापित करने का आरोप

महासमुंद जिले के सरायपाली विधानसभा क्षेत्र के ग्राम जंगलबेड़ा में प्रस्तावित गोदावरी सोलर पावर प्लांट के विरोध में ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन पिछले 15 दिनों से जारी है। सरायपाली एसडीएम कार्यालय के बाहर चल रहे इस धरने को खल्लारी विधायक द्वारिकाधीश यादव और सरायपाली विधायक चातुरी नंद ने समर्थन दिया। बसना के पूर्व विधायक राजा देवेंद्र बहादुर सिंह भी प्रदर्शनकारियों के साथ धरने पर बैठे। जंगलबेड़ा के ग्रामीण 6 फरवरी से गोदावरी सोलर पावर प्लांट के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। पहले यह प्रदर्शन गांव में हो रहा था, लेकिन बीते सोमवार से ग्रामीण सरायपाली अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय के बाहर धरना दे रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यह प्लांट बिना ग्रामसभा की सहमति के स्थापित किया जा रहा है। वे अवैध पेड़ कटाई, तालाब और निस्तार भूमि को पाटने, तथा सार्वजनिक रास्ते पर कब्जे का विरोध कर रहे हैं। विधायक ने सराकर पर साधा निशाना इस दौरान खल्लारी विधायक द्वारिकाधीश यादव ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केंद्र में मोदी सरकार और छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार बनने के बाद उद्योगपतियों के लिए जंगल उजाड़े जा रहे हैं। यादव ने आरोप लगाया कि सरकार उद्योगपतियों को 400 एकड़ जमीन आसानी से दे देती है, जबकि गरीबों को आधा एकड़ जमीन या वन अधिकार पट्टा नहीं मिल पाता। विधायक यादव ने आगे कहा कि सरकार उद्योगपतियों को व्यक्तिगत लाभ पहुंचाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने बताया कि जमीन लीज आवंटन की शर्तों के अनुसार, सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना पेड़ नहीं काटे जा सकते, लेकिन यहां हजारों पेड़ काटे गए हैं। ग्रामीणों की मांगों पर सुनवाई नहीं होने का आरोप विधायक चातुरी नंद ने कहा कि पूरे प्रदेश में शासकीय जमीन, किसानों की निजी जमीन को हड़पकर उद्योगपतियों को सौंपने का काम भाजपा सरकार कर रही है। छत्तीसगढ़ के जल, जंगल और जमीन को उद्योगपतियों को सौंपने का षड्यंत्र पूरे प्रदेश में किया जा रहा है। ऐसे ही जंगलबेडा में भी बिना ग्रामसभा के सहमति लिए प्लांट की स्थापना शासन प्रशासन की सह पर हो रहा है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से शिकायत करने के बावजूद ग्रामीणों की मांगों पर कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है जिसके चलते ग्रामीण धरना प्रदर्शन को बाध्य है।

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