राजस्थान के विधिक गलियारों में लंबे समय से बना इंतजार अब खत्म हो गया है। बार काउंसिल ऑफ राजस्थान (बीसीआर) के बहुप्रतीक्षित चुनाव का आधिकारिक कार्यक्रम शुक्रवार को घोषित किया गया। करीब तीन साल की देरी और पिछले चुनाव के 8 साल बाद हो रहे इन चुनाव को लेकर अधिवक्ताओं में भारी उत्साह है। हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी द्वारा स्वीकृत यह चुनाव कार्यक्रम न केवल राजस्थान के 1 लाख से अधिक वकीलों के भविष्य को तय करेगा। वहीं इस बार पहली बार महिला आरक्षण सहित कई ऐतिहासिक बदलावों का गवाह भी बनेगा। चुनाव कार्यक्रम: 22 अप्रैल को वोटिंग, 29 को मतगणना
बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के कार्यवाहक सचिव विकास ढाका द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार चुनावी प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से शुरू हो गई है। चुनाव की मुख्य तिथियां और प्रक्रिया इस प्रकार निर्धारित की गई हैं: ऐतिहासिक परिवर्तन: पहली बार महिला आरक्षण लागू
इस बार का चुनाव राजस्थान के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही दिए गए निर्देशों के अनुपालन में बार काउंसिल की सीटों में महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई है। नामांकन शुल्क और दिव्यांगों को बड़ी राहत
चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए बार काउंसिल ने शुल्क संरचना भी स्पष्ट कर दी है- फ्लैशबैक: 2018 के पिछले चुनाव और देरी की वजह
राजस्थान बार काउंसिल के पिछले चुनाव 28 मार्च 2018 को हुए थे। उस समय चुनाव समय पर हुए थे और मतदाता सूची में 60 हजार से अधिक एडवोकेट्स शामिल थे। नियमानुसार बार काउंसिल का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है, जो वर्ष 2023 में समाप्त हो गया था। हालांकि कोविड-19 महामारी, मतदाता सूचियों के वेरिफिकेशन की जटिल प्रक्रिया और आरक्षण संबंधी कानूनी विवादों के कारण चुनाव टलते रहे। अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में करीब 3 साल की देरी के बाद यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया दोबारा शुरू हो रही है। प्रशासन की तैयारी
बार काउंसिल ने सभी जिला और उपखंड बार एसोसिएशनों को निर्देश दिए हैं कि वे चुनाव अधिसूचना को अपने नोटिस बोर्ड पर प्रमुखता से चस्पा करें। साथ ही राजस्थान बार काउंसिल ने नोटिस को आधिकारिक गजट और दो प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित करने की तैयारी भी पूरी कर ली है।


