सीकर जिले में स्थित विश्वविख्यात खाटूश्यामजी मंदिर में 21 से 28 फरवरी तक फाल्गुनी मेला आयोजित किया जाएगा। इस वर्ष तकनीकी नवाचार और आधुनिक प्रबंधन प्रणाली पर विशेष जोर दिया गया है। मेले में श्रद्धालुओं को सोशल मीडिया से जानकारी मिलती रहेंगी। मेले में इस बार करीब 35 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। यह देखते हुए राजस्थान पुलिस, जिला प्रशासन और मंदिर कमेटी ने मिलकर सुरक्षा, यातायात और भीड़ नियंत्रण की व्यापक तैयारियां की हैं। वहीं पदयात्रियों को ध्यान में रखते हुए रिंगस से खाटूश्यामजी तक इस बार भी शनिवार से 17 किलोमीटर लंबा विशेष पैदल कॉरिडोर तैयार किया गया है। मेले में वाहनों के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास मार्ग तय किए गए हैं। खाटूश्यामजी कस्बा और रींगस रोड को पूरी तरह नो-व्हीकल जोन घोषित किया गया है। पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए राजस्थान पुलिस के इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स प्लेटफॉर्म पर ट्रैफिक, पार्किंग, दर्शन और आपात सूचनाएं लगातार शेयर की जाएंगी। वहीं 27 फरवरी को एकादशी पर निकलने वाली रथ यात्रा के लिए विशेष सुरक्षा योजना बनाई गई है। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त बैरिकेडिंग, मजिस्ट्रेट तैनाती और पुलिस बल रहेगा। भीड़ नियंत्रण के लिए पूर्व निर्धारित डायवर्जन लागू रहेगा। रिंगस से खाटू तक विशेष पैदल कॉरिडोर
पदयात्रियों की परंपरा को ध्यान में रखते हुए रिंगस से खाटू तक 17 किलोमीटर लंबा विशेष पैदल कॉरिडोर तैयार किया गया है। यह मार्ग पूरी तरह वाहनों से मुक्त रहेगा। पूरे रास्ते में पानी, लाइट, शौचालय और विश्राम स्थल की व्यवस्था रहेगी। 22 सेक्टर और 350 सब-सेक्टर में सुरक्षा कवच
मेले को 22 मुख्य सेक्टर और 350 सब-सेक्टर में बांटा गया है। करीब 5 हजार से अधिक पुलिस अधिकारी व जवान तैनात रहेंगे। प्रमुख स्थानों पर बैरिकेडिंग, अस्थायी चौकियां और अतिरिक्त बल की व्यवस्था की गई हैं। पूरे मेला क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरों से कंट्रोल रूम के माध्यम से रीयल-टाइम निगरानी होगी। 44 एलईडी स्क्रीन और QR कोड सुविधा
मंदिर परिसर और प्रवेश द्वारों पर 44 डिजिटल एलईडी स्क्रीन लगाई गई हैं। इन पर दर्शन की प्रतीक्षा अवधि, पार्किंग स्थिति, सुरक्षा निर्देश, मौसम अलर्ट और आपात नंबर प्रदर्शित होंगे। साथ ही QR कोड आधारित मार्गदर्शन प्रणाली से श्रद्धालुओं को आसान नेविगेशन मिलेगा। मेला परिसर में 12 पुलिस सहायता बूथ स्थापित किए गए हैं, जो लैंडलाइन और वायरलेस सुविधा से जुड़े रहेंगे। यहां गुमशुदा व्यक्ति या सामान से संबंधित जानकारी और जल्द सहायता मिलेगी। रंग-कोडेड नि:शुल्क पार्किंग व्यवस्था
प्रतिदिन आने वाले 25 हजार से अधिक वाहनों के लिए चार बड़े पार्किंग स्थल विकसित किए गए हैं। इन सभी पार्किंग स्थलों के लिए QR कोड और रंगीन पहचान चिह्न लगाए गए हैं। 25 रुपए में ई-रिक्शा सेवा, हेल्पलाइन नंबर से मिलेगी सहायता
पार्किंग से दर्शन स्थल तक आवागमन के लिए 2000 ई-रिक्शा पास जारी किए गए हैं। श्रद्धालु मात्र 25 रुपए में मंदिर तक पहुंच सकेंगे। श्रद्धालुओं के लिए पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112 और मोबाइल नंबर 9667600788 उपलब्ध कराया गया है। दोनों नंबर 24 घंटे सक्रिय रहेंगे। नशामुक्ति और साइबर जागरूकता अभियान
डीजीपी के निर्देश पर मेले के होल्डिंग एरिया में नशामुक्ति शपथ दिलाई जाएगी। साथ ही साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। भीड़ का दबाव कम करने के लिए अतिरिक्त जिगजैग मार्ग, फुट ब्रिज और 40 बीघा का नया होल्डिंग एरिया विकसित किया गया है, जहां जरूरत पड़ने पर श्रद्धालुओं को सुरक्षित रोका जाएगा। सड़क, रेल और हवाई मार्ग से सुगम पहुंच
देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवागमन की स्पष्ट व्यवस्था की गई है। पास ही हवाई अड्डा जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। रींगस जंक्शन 17 किलोमीटर और सीकर जंक्शन 40 किलोमीटर दूर है। जयपुर और सीकर से नियमित बस सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। डीजीपी की श्रद्धालुओं से अपील
डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित मार्गों और पार्किंग जोन का पालन करें, अनुशासन बनाए रखें और पुलिस प्रशासन का सहयोग करें। उन्होंने कहा- राजस्थान पुलिस का प्रयास है कि हर श्रद्धालु सुरक्षित, सहज और श्रद्धापूर्ण वातावरण में बाबा के दर्शन कर सके।


