भास्कर न्यूज| महासमुंद/ बल्दीडीह जिले में पिथौरा ब्लॉक अंतर्गत पिपरौद और कंचनपुर के ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। यहां के ग्रामीण गड्ढों से भरे जर्जर मार्ग पर चलने को मजबूर हैं। सबसे बड़ा दर्द स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर है। बदहाल सड़क के कारण शासकीय इमरजेंसी वाहन 108 एंबुलेंस को गांव तक पहुंचने में घंटों लग जाते हैं। ग्राम कंचनपुर के पूर्व सरपंच राजेश साव ने बताया कि गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों के लिए समय पर अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती है। जर्जर मार्ग का असर अब बच्चों की शिक्षा पर भी पड़ रहा है। सांकरा स्थित हाईस्कूल और पिथौरा कॉलेज जाने वाले छात्र इसी खतरनाक रास्ते से गुजरते हैं। सड़क की स्थिति इतनी खराब है कि कई अभिभावक दुर्घटना के डर से बच्चों की पढ़ाई छुड़वाकर उन्हें घर के कामकाज में लगाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने बताया कि 2021 में पूर्व सरपंच राजेश साव के कार्यकाल में वन विभाग ने 80 लाख का एस्टीमेट तैयार किया था, लेकिन वह फाइलों तक सीमित रह गया। 2023 में तत्कालीन कलेक्टर नीलेश कुमार क्षीरसागर को ज्ञापन सौंपा था। तब इंजीनियरों ने सड़क की नाप-जोख भी की थी, लेकिन नतीजा सिफर रहा। अभी पंडरीपानी, बारिकपाली, कंचनपुर, मोहगांव और धरमपुर जैसे 10 गांवों के ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं। कलेक्टर विनय कुमार लहंगे ने कहा कि एस्टीमेट की स्थिति की जांच करेंगे। काम छोटे बजट का होगा, तो तत्काल स्वीकृति दी जाएगी। बजट अधिक होगा, तो शासन से सहायता मांगी जाएगी।


