पुलिस की सख्ती व जागरूकता अभियान से ग्रामीणों ने अफीम के अवैध धंधे से मुंह मोड़ा

भास्कर न्यूज| चाईबासा अफीम की खेती को लेकर बदनाम प. सिंहभूम जिले का बंदगांव की पहाड़ियों में इस बार पिछले साल की तुलना में अस्सी फीसदी कम खेती हुई है। चोरी छिपे वनभूमि पर खेती हुई है। जबकि पिछले साल 2024- 2025 में पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और खूंटी जिले के ट्राई जंक्शन (सीमावर्ती) क्षेत्रों में लगभग 700 एकड़ से अधिक भूमि पर अवैध अफीम की खेती की गई थी। तब सिर्फ प सिंहभूम जिले के पहाड़ियोंे में ही 400 एकड़ के करीब अफीम के खेतों को पुलिस ने रौंद दिया था। जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के कारण अफीम तस्करों के लिए सुरक्षित पनाहगार बना हुआ था। इस बार पुलिस के जागरूकता अभियान व लगातार कार्रवाई से लोगों ने अफीम के खेती से मुंह मोड़ा है। लेकिन अब भी चोरी छिपे खेती जारी है। पिछले जनवरी महीने से अब तक में 7 से 8 एकड़ में खेती को पुलिस नष्ट किया है। रांची चाईबासा घाटी इलाके में तीन थाने हैं। कराईकेला, टेबो व बंदगांव थाने हैं। इसमें टेबो व बंदगांव थाने में अफीम की खेती पिछले साल भरपूर हुई थी। प. सिंहभूम पुलिस ने जिले में हो रहे अफीम की अवैध खेती पर रोक लगाने के लिए सामाजिक प्रभाव डाला। स्थानीय गांवों के ग्राम प्रधानों को बैठक कर जिम्मेवार बनाया ।बैठकों में समझाया कि कैसे आनुवांशिक नुकसान हो रहा है। इस बीच कई बाहरी तस्करों के साथ स्थानीय युवक भी खरीद फरोख्त में जेल गये। इसका असर भी समाज पर पड़ा है। हालांकि पूरी तरह यह खेती खत्म होने में समय लगेगा। टेबो थानेदार सुनील मरांडी बताते हैं कि लगातार लोगों को समझाया जा रहा है। इसका सीधा असर परिवार पर पड़ा है। इसके कारण लोग इस गलत धंधे से दूर हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर सूचनाओं को भी लिया जा रहा है।

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