लव कुमार दूबे | गढ़वा जिले में गर्मी की दस्तक से पहले ही ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट गहराने लगा है। विशेषकर गढ़वा प्रखंड के बघमार गांव की स्थिति अभी से ही चिंताजनक हो गई है। हर वर्ष मार्च महीने से ही गांव में पानी की समस्या विकराल रूप धारण कर लेती है, जिससे सैकड़ों ग्रामीण प्रभावित होते हैं। करीब 500 से 600 की आबादी वाले इस गांव में भुइंया, महतो, पाल और चंद्रवंशी समुदाय के लोग निवास करते हैं। गांव में पेयजल की व्यवस्था के नाम पर तीन सरकारी चापानल और तीन जलमीनार लगाए गए थे, लेकिन इनमें से अधिकांश अनुपयोगी हो चुके हैं। दो जलमीनार पूरी तरह खराब पड़े हैं, जबकि एक जलमीनार से बहुत कम मात्रा में पानी निकलता है, जिससे केवल आसपास के एक-दो घरों को ही लाभ मिल पाता है। चापानलों की स्थिति भी दयनीय है। तीन में से दो चापानल पूरी तरह डेड हो चुके हैं, जबकि एक से रुक-रुक कर पानी निकलता है। ऐसे में ग्रामीणों को मजबूरन कुएं का सहारा लेना पड़ रहा है। गर्मी बढ़ने के साथ कुओं का जलस्तर भी गिरने लगता है और लोग गंदा पानी पीने को विवश हो जाते हैं। पेयजल की समस्या से कईं वर्षों से जूझते आ रहे हैं, किसी का ध्यान नहीं : ग्रामीण ग्रामीण सोनी देवी, पार्वती देवी, कमलेश महतो, पिंटू राम आदि ने कहा कि हमलोग वर्षों से पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। दो वर्ष पूर्व गांव में तीन जलमीनार लगाए गए। कनेक्शन तक घरों तक नहीं किया जा सका। गर्मी के दिनों में 500-600 मीटर दूरी से कुआं से पानी लाते हैं। पांच वर्ष पहले तीन सरकारी चापानल था। जिसमें से दो पहले से ही खराब पड़ा हुआ है। मरम्मति तक नहीं की जाती है। पंचायत के प्रतिनिधि से लेकर अधिकारी तक किसी का ध्यान नहीं है। आवेदन दें, मरम्मत कराई जाएगी : ईई पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता अजय कुमार सिंह ने कहा कि चापानल खराब होने की आवेदन पर तुरंत मरम्मति कार्य कराया जाता है। चापानल मरम्मति के लिए विभाग के पास आठ टीम है।


