भास्कर न्यूज | बूंदी वन विभाग द्वारा फ्रांस सरकार की विकास सहयोग एजेंसी (एएफडी) के वित्तीय सहयोग से राजस्थान वानिकी व जैव विविधता विकास परियोजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। यह परियोजना राज्य में वन संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन व सतत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से संचालित है। राजस्थान में यह परियोजना वर्ष 2023-24 से राज्य के 13 जिलों में संचालित की जा रही है, जिसमें बूंदी जिले को भी शामिल किया है। राज्य के 13 जिलों के लगभग 800 गांवों में योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। बूंदी जिले के 60 गांवों को इस परियोजना में शामिल किया गया है। इन चयनित गांवों में ग्रामस्तर पर ग्राम वन सुरक्षा व प्रबंधन समितियां बनाई है। ताकि ग्रामीण किसानों को अधिकतम लाभ दिया जा सके। परियोजना निदेशक राजेश गुप्ता के मार्गदर्शन में संयुक्त परियोजना निदेशक टी. मोहनराज के निर्देशन में उप वन संरक्षक एएन गुप्ता द्वारा आरएफबीडीपी परियोजना के तहत कृषि वानिकी गतिविधियों की प्रगति व कार्ययोजना पर बैठक की गई। बैठक में परियोजना सलाहकार टीम से जॉन दुरुपतार व हेमंत वैद्य परियोजना सहयोगी टीम से राघवेंद्र सुजानिया व मंडल बूंदी से सुनील धाबाई सहायक वन संरक्षक नैनवां, महेन्द्र जैन (डीपीसी), विनोद चौधरी (आरवीटीआर-डीपीसी) व किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे। परियोजना के तहत जिले में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के सहयोग से किसानों को गुणवत्तायुक्त पौधे निशुल्क दिए जाएंगे। इनमें अरहर, नींबू, संतरा, आंवला, मोरिंगा, सागवान की आयवर्धक व उपयोगी प्रजातियां शामिल है। इन पौधों के रोपण से हरित क्षेत्र में वृद्धि होगी,किसानों को दीर्घकाल में अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा। इस तरह लाभ मिलेगा, प्रोत्साहन राशि मिलेगी पौधों के संरक्षण व संवर्धन को प्रोत्साहित करने के लिए प्रोत्साहन राशि का प्रावधान किया गया है। योजना के अनुसार एक वर्ष पश्चात 20 रुपए प्रति जीवित पौधा, दो वर्ष पश्चात 25 रुपए प्रति जीवित पौधा, तीन वर्ष पश्चात 35 रुपए प्रति जीवित पौधा व चार वर्ष पश्चात 45 रुपए प्रति जीवित पौधा की दर से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। जिले के किसान इस योजना का लाभ उठाने के लिए अपने नजदीकी किसान उत्पादक संगठन से संपर्क कर सकते हैं। वन विभाग की इस योजना में भागीदारी निभा सकते हैं।


