संजय तिवारी | अमृतसर सड़क पर वाहन लेकर निकलते वक्त हम अक्सर सोचते हैं कि रोज का वही रास्ता है, थोड़ी सी दूरी के लिए हेल्मेट की क्या जरूरत?’ या सीट बेल्ट के बिना भी काम चल जाएगा।’लेकिन यही चंद पलों की लापरवाही कई हंसते-खेलते परिवारों को उम्र भर का जख्म दे रही है। दैनिक भास्कर द्वारा पिछले चार वर्षों के सड़क हादसों के डेटा का विश्लेषण करने पर सच्चाई सामने आई है कि सड़क पर असली दुश्मन रफ्तार से ज्यादा हमारी अपनी अनदेखी है। 1 जनवरी 2022 से 16 फरवरी 2026 तक के आंकड़े बताते हैं कि जिले में हुए 183 हादसों में 87 लोगों ने अपनी जान गंवाई। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 54 मौतें करीब 62% पूरी तरह से खुद की लापरवाही का नतीजा थीं। मरने वाले 31 दोपहिया वाहन चालकों ने हेल्मेट नहीं पहना था, वहीं 23 कार सवारों की जान सिर्फ इसलिए चली गई क्योंकि उन्होंने सीट बेल्ट नहीं लगाई थी। अक्सर हम हादसों का दोष खराब सड़कों या तेज रफ्तार को देते हैं, लेकिन यह डेटा गवाही देता है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी सुसाइड से कम नहीं है। प्रफुल्ल जोशी, ट्रैफिक सुरक्षा विशेषज्ञ सीट बेल्ट लगाने से कार सवार परिवार की बची थी जान : ट्रैफिक सैल इंचार्ज एसआई दलजीत सिंह ने बताया कि 23 जनवरी को फिरोजपुर से सिटी नई कार की डिलीवरी लेने के लिए परिवार के 5 सदस्य पहुंचे थे। जो कार लेकर वापस फिरोजुपर जा रहे थे। तरनतारन रोड पर सामने से आ रही कार से उनकी कार की टक्कर हो गई। मगर नई कार में सवार पांचों लोगों ने सीट बेल्ट लगा रखे थे, जिस कारण जान बच गई। 12 दिसंबर 2025 को भगतांवाला गेट इलाके में बोलेरो सवार ने स्कूटी पर जा रहे 2 दोस्तों को टक्कर मार दी थी। हादसे में करनदीप सिंह की सिर में गंभीर चोट लगने से मौत हो गई, जबकि उसका दोस्त गुरकीरत घायल हो गया। हेल्मेट लगाया होता तो जान बच जाती। ट्रैफिक पुलिस रोज हेल्मेट-सीट बेल्ट के 30 चालान कर रही है। वहीं विभिन्न सैल हर दूसरे दिन हेल्मेट और सीट बेल्ट पहनने के लिए लोगों को सोशल मीडिया एप और लाइव जागरूक करती है। ट्रैफिक नियम की शिक्षा बहुत जरूरी है। मगर राहगीर इस पर अमल नहीं कर रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस नियम की उल्ल्घंन्न करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करती है। लोग जागरूक हों और नियमों की पालना करें। – अमरदीप कौर, एडीसीपी ट्रैफिक। सड़क हादसे के बाद जब परिजन इंश्योरेंस क्लेम के लिए आवेदन करते हैं, तो कुछ केसों में सुरक्षा नियमों का उल्लंघन बड़ी बाधा बन जाता है। बीमा कंपनियां एफआईआर की कॉपी के आधार पर क्लेम का निपटारा करती हैं। यदि हादसे के वक्त चालक ने हेल्मेट या सीट बेल्ट न पहनी हो, तो क्लेम खारिज हो सकता है। इतना ही नहीं, नशे में ड्राइविंग करना या जूतों के बजाय चप्पल पहनकर वाहन चलाना भी नियमों का उल्लंघन माना जाता है, जिससे क्लेम मिलने में दिक्कत आती है। हालांकि, ऐसे मामले महज 2 से 3% ही होते हैं। 8 साल में दो बार हादसे में हेल्मेट ने बचाई जान : सिटी के रहने वाले अरविंदर कुमार ने बताया कि 8 साल में 2 बार सड़क हादसा हुआ। पहला हादसा 2013 में कत्थूनंगल नहर के पास हुआ। उनका सिर पत्थर से जा टकराया। पर हेल्मेट के कारण बचाव हो गया। इसके अलावा वर्ष 2021 में नैय्या वाला मोड़ पुल पर बाइक चलाते समय अचानक कुत्ता आने से टक्कर हो गई थी। एक हेल्मेट ने मेरी दो बार जिंदगी बचाई। 17 जनवरी 2026 को सुबह साढ़े 8 बजे सिटी से बटाला की ओर जा रहे बाइक सवार की रॉन्ग साइड से आ रही स्कूल वैन के साथ टक्कर हो गई। जिस दौरान बाइक सवार युवक अमनप्रीत सिंह सड़क के किनारे गिर गया और उसके सिर में गंभीर चौट लगने से उसकी मौके पर मौत हो गई। उसने हेल्मेट नहीं पहन रखा था। अगर हेल्मेट पहना होता तो उसकी जान बच सकती थी। यह हादसा कत्थूनंगल टोल प्लाजा के पास हुआ था। हालांकि पुलिस ने इस मामले में स्कूली वैन चालक पर केस दर्ज किया। पंजाब में हर साल 4 से 5 हजार लोगों की हादसे में मौतें हो जाती हैं। जिसमें अधिकतर 70 से 80 % मरने वालों में टू-व्हीलर ने ही हेल्मेट नहीं पहना होता है और कार में सवार युवक सीट बैल्ट नहीं लगाते हैं। ट्रैफिक की नियमों की पालना करना बेहद जरूरी है, जो आज-कल के लोग नहीं कर रहे हैं। हेल्मेट पहनने से 70 फीसदी बचाव रहता है। वहीं आज-कल लोग सीट बेल्ट न लगाकर वाहन चलाते हैं। कार में जब तक सीट बेल्ट न लगाओ तो कार में एक साउंड चलती रहती है। लोगों ने उसका इस्तेमाल करने के बजाए सीट बेल्ट को पहले ही लगा देते हैं, फिर उस पर बैठ कर ड्राइव करते हैं, तांकि साउंड से बच सके। 10 दिसंबर 2025 को माहला बाईपास अंडर ब्रिज की दीवार से ओवरस्पीड कार टकरा गई। इस हादसे में कार सवार तीन दोस्तों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चौथा साथी गंभीर रूप से जख्मी हो गया था। अगर सीट बैल्ट लगाई होती तो जान बच जाती।


