डाहानी के शक में हत्या या बहिष्कार गैरकानूनी, समझाया

भास्कर न्यूज| रायगड़ा डाहानी संदेह के नाम पर होने वाली अमानवीय घटनाओं की रोकथाम और समाज में व्यापक जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से जिला परिषद सभागार में शुक्रवार को कार्यशाला का आयोजन किया गया। अध्यक्षता जिला समाज कल्याण अधिकारी मिनती देवो ने की। उन्होंने कहा कि डाहानी के नाम पर निर्दोष लोगों, विशेषकर महिलाओं को प्रताड़ित करना, सामाजिक बहिष्कार करना, हिंसा और हत्या जैसी घटनाएं अत्यंत चिंताजनक हैं। जिला प्रशासन इस कुप्रथा के उन्मूलन के लिए निरंतर प्रयासरत है। कार्यक्रम में पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, सूचना एवं लोकसंपर्क विभाग तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला में यह बताया गया कि डाहानी जैसी धारणा अंधविश्वास पर आधारित है और कई बार मानसिक बीमारी को भी गलत रूप में प्रस्तुत कर दिया जाता है। ऐसे मामलों में झाड़-फूंक या गुनिया के पास जाने के बजाय चिकित्सक या मानसिक रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना आवश्यक है। ओडिशा डाहानी शिकार निराकरण अधिनियम, 2013 के प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर पांच वर्ष तक की सजा और पांच हजार रुपये या उससे अधिक का जुर्माना हो सकता है। एफआईआर दर्ज करने से लेकर चार्जशीट तक की प्रक्रिया, साक्ष्य संकलन और कानूनी कार्रवाई की जानकारी भी दी गई। डाहानी संदेह के कारण नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन होता है, जिसमें कानून के समक्ष समानता, लिंग आधारित भेदभाव से संरक्षण और सम्मानपूर्वक जीवन का अधिकार शामिल है। शिक्षा और जागरूकता की कमी इस कुप्रथा का प्रमुख कारण बताई गई। बीमारी की स्थिति में अस्पताल जाने तथा अंधविश्वास से दूर रहने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा, किशोरियां और स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। हेल्पलाइन 181, 1098 और 14678 पर संपर्क करने की जानकारी दी गई।

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