प्रदेश में वाहनों की फिटनेस व्यवस्था खुद सवालों के घेरे में आ गई है। दरअसल, पिछले दिनों राजस्थान हाईकोर्ट ने परिवहन विभाग को फिटनेस सेंटर्स से वाहनों की फिटनेस व्यवस्था जारी रखने के निर्देश दिए थे। इसके बाद यहां से वाहनों की फिटनेस की जा रही है, लेकिन वो सेंटर भी वाहनों की फिटनेस कर रहे हैं, जिनका खुद का लाइसेंस एक्सपायर हो गया है। प्रदेश में कुल 83 फिटनेस सेंटर और 2 ऑटोमैटिक टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) हैं। पिछले दिनों परिवहन विभाग ने एटीएस से फिटनेस को अनिवार्य किया और पुराने फिटनेस सेंटरों को बंद करने के निर्देश दिए। लेकिन फिटनेस सेंटर संचालक ने विभाग के इस निर्णय को कोर्ट में चुनौती दी, जहां कोर्ट ने विभाग के इस निर्णय पर रोक लगा दी थी। इसके बाद जयपुर में 34 फिटनेस सेंटर खुल गए, लेकिन इनमें 20 से अधिक सेंटर के लाइसेंस एक्सपायर हो चुके हैं, फिर भी सेंटर द्वारा धड़ल्ले से वाहनों की फिटनेस की जांच की जा रही है। 72 एटीएस के लिए पीआरसी दी, 7 ने आरसी के लिए आवेदन किया विभाग द्वारा प्रदेश में नए एटीएस खोलने के लिए पिछले साल जुलाई से आवेदन मांगे गए। इनमें से 72 आवेदकों को 6 माह पहले स्थायी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (पीआरसी) भी जारी कर दिया है। वहीं] जयपुर, अजमेर, अलवर, जोधपुर, हनुमानगढ़, कोटा और नागौर में तो नए एटीएस बनकर तैयार हैं। ऐसे में इन्हें शुरू करने के लिए रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) के लिए आवेदन किया जा चुका है। लेकिन विभाग से अब तक संचालन की अनुमति नहीं मिली। उधर, ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि फिटनेस न होने पर भारी चालान और व्यापारिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। बिना वैकल्पिक व्यवस्था सख्ती से लागू नियम लोगों और विभाग में के लिए परेशानी बन रहा है। गौरतलब है कि कोर्ट ने 15 अप्रैल तक ही फिटनेस सेंटर्स खोले रखने के आदेश दिए हैं। जबकि जिन फिटनेस सेंटर्स के लाइसेंस एक्सपायर हैं, उन्हें तत्काल बंद करने के निर्देश दिए हैं। सिर्फ जयपुर एटीएस के भरोसे पूरी व्यवस्था प्रदेश में सिर्फ दो एटीएस सेंटर जयपुर और किशनगढ़ में हैं। किशनगढ़ एटीएस सेंटर का लाइसेंस विभाग ने ससपेंड कर दिया था। ऐसे में वो करीब 6 महीने से बंद पड़ा है। ऐसे में सिर्फ जयपुर का एटीएस ही संचालन में है। जबकि राजस्थान में 10 लाख से अधिक व्यावसायिक वाहन हैं, जिनकी हर साल फिटनेस अनिवार्य है। रोजाना प्रदेशभर में 5 हजार और अकेले जयपुर में एक हजार से अधिक वाहनों की फिटनेस की जरूरत पड़ती है। ऐसे में एक एटीएस के भरोसे पूरी व्यवस्था चल पाना संभव नहीं है। उधर, परिवहन विभाग ने पहले फिटनेस जांच केवल एटीएस से कराने को अनिवार्य किया था। दबाव बढ़ने पर आरटीओ-डीटीओ कार्यालयों से मैन्युअल फिटनेस की अनुमति दी गई, लेकिन अनियमितताओं और बिना वाहन फिटनेस जारी करने के आरोपों के बाद इसे भी बंद कर दिया।


