सोसायटी के बैकडेट पट्टों का फ्रॉड रोकने के बजाय जेडीए संरक्षण दे रहा है। इसका खुलासा विधानसभा में दिए जवाब और जेडीए में जमा रिकॉर्ड की पड़ताल में हुआ है। एक विधायक ने पूछा- जेडीए सोसायटी की कॉलोनियों का नियमन करती है? सादा कागज पर एग्रीमेंट वाली कॉलोनी का नियमन होता है? जेडीए का जवाब है 17 जून 1999 से पूर्व बसाई कॉलोनी का ही नियमन किया जाता है। सादा कागज पर एग्रीमेंट की कानूनी मान्यता नहीं है, जेडीए नियमन नहीं करता, ये अवैध हैं। भास्कर ने जेडीए के जवाब का सच ढूंढ़ा, पता चला जेडीए ने विधानसभा में झूठ बोला। जेडीए के रिकॉर्ड में ऐसी कई कॉलोनी है, जिसकी जमीन सोसायटी ने स्टाम्प के बजाय सादा कागज पर खरीदना बताया गया है। ऐसे मे साफ है कि पैसे लेकर जेडीए के अफसर पट्टे बांट रहे हैं। जमीन खरीद 1999 से पहले दिखाना जरूरी, इसलिए होता बैकडेट एग्रीमेंट
जेडीए ने 1999 में सोसायटियों से रिकॉर्ड मांगा था। इसके बाद बसाई सोसायटी कॉलोनियों का नियमन नहीं हो रहा। बैकडेट के एग्रीमेंट स्टाम्प पर हों या सादे कागज पर, स्वीकार करता है। को-ऑपरेटिव सोसायटी कॉलोनी बसाने के लिए जो जमीन खरीदना बताती है, उसकी रजिस्ट्री नहीं कराती। एग्रीमेंट से जमीन खरीद बता सरकार का रेवन्यू चोरी किया जाता है। राजस्व रिकॉर्ड में जमीन खातेदार के नाम रहती है। कार्रवाई गरीब पट्टाधारकों पर
गैर कानूनी कॉलोनी काटने वालों की विभागों में पैठ होती है। ऐसे में शिकायत पर भी कार्रवाई नहीं होती। बिना रजिस्ट्रार की जानकारी के जमीन खरीदना और बिना जेडीए से भूमि रूपांतरण पट्टे देने वाली सोसायटी से पूछा तक नहीं जाता। शिकायत होती है तो पट्टा खरीदने वालों के मकानों पर जेडीए बुलडोजर चलाता है। जेडीए आज तक अवैध कॉलोनी नहीं रोक पाया। सहकारी विभाग की मिलीभगत- अधिकार विहीन समिति बेच रही पट्टे सहकारी अधिनियम में है- सोसायटी जमीन रजिस्ट्री से खरीदने के बाद रजिस्ट्रार से प्लान मंजूर कराएगी। मंजूरी के बाद प्लान को निकाय-अथॉरिटी से पास कराना होगा। इसके बाद ही योजना सृजित की जा सकती है। एक सोसायटी एक कॉलोनी विकसित कर सकती है।
हो यह रहाः जिन सोसायटियों में गड़बड़ी की शिकायत है, उसे डिप्टी रजिस्ट्रार संचालक का अधिकार को-ऑपरेटिव इंस्पेक्टर को देते हैं। हालांकि सोसायटी संचालक न रिकॉर्ड देते हैं, ना आदेश मानते हैं। अधिकार छिनने के बाद भी संचालक बैकडेट में सौदे करते हैं, पट्टे बेचते हैं। 1) राजहंस गृह निर्माण सहकारी समिति लि. फुलेरा को डिप्टी रजिस्ट्रार जयपुर रूरल ने कुछ माह पहले अवसायन में लिया है। समिति के अधिकार छीन लिए हैं। सोसायटी कालवाड़ रोड पर शाकम्भरी नगर के नाम से पट्टे दे रही है। हालांकि अधिकारी कह रहे हैं कि हम कुछ नहीं कर सकते।
2) रामराजपुरा गृह निर्माण सहकारी समिति 2014 से अवसायन में है। इसके बाद भी संचालक जानकारी शरण गुप्ता न केवल पट्टे ट्रांसफर कर रहा है बल्कि नए कालोनी के पट्टे देने के लिए भी तैयार है। भास्कर ने जब जेडीए के अफसर को कागज दिखाया तो बोले-हमारा बहुत ज्यादा संदर्भ नहीं है
वैसे तो स्टाम्प पेपर वाले एग्रीमेंट ही मान्य हैं। सादा पेपर पर हुए जमीन के सौदे वाले मामलों को जेडीए में मान्यता नहीं है। वर्ष 1999 के बाद वाले रिकार्ड पर नियमन नहीं हो रहा। वैसे इस मामले में सहकारिता प्रकोष्ठ का ज्यादा संदर्भ नहीं है।
-नवल किशोर मीणा, डिप्टी रजिस्ट्रार (सहकारिता प्रकोष्ठ) जेडीए


