छत्तीसगढ़ के गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने एक बार फिर हाईकोर्ट को गुमराह करते हुए शपथपत्र दिया। इसमें बताया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित कर दिया गया है। लेकिन, याचिकाकर्ता कर्मचारियों को अब तक नियमितीकरण आदेश नहीं मिला है। न ही यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अब तक नियमितीकरण का आधिकारिक आदेश जारी किया है। दरअसल, साल 2008 में राज्य शासन ने 10 साल की सेवा अवधि पूरी करने वाले दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित करने का आदेश दिया था। इस आदेश के परिपालन में गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी के तत्कालीन कुलपति प्रो. एलएम. मालवीय ने तृतीय और चतुर्थ वर्ग के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित करने का आदेश जारी किया था। लेकिन, 2009 में जैसे ही राज्य यूनिवर्सिटी को ‘केंद्रीय’ दर्जा मिला, प्रबंधन ने पुरानी शर्तों को ताक पर रखकर नियमितीकरण का आदेश ही निरस्त कर दिया। इसके बाद पीड़ित कर्मचारी परेशान होते रहे। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पालन नहीं
यूनिवर्सिटी प्रबंधन के खिलाफ कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच और डिवीजन बेंच ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला दिया, जिसके बाद यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील किया। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। तब भी यूनिवर्सिटी प्रबंधन के खिलाफ फैसला आया। यूनिवर्सिटी ने रिव्यू पिटीशन भी लगाई, लेकिन इसे खारिज कर कर्मचारियों के पक्ष में फैसला बरकरार रखा। जाहिर है कि अब यूनिवर्सिटी प्रबंधन को कर्मचारियों को नियमित करने के साथ ही बकाया राशि सहित सभी भुगतान करना होगा। यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने कोर्ट को किया गुमराह
यूनिवर्सिटी प्रबंधन के अड़ियल रवैए से परेशान कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है, जिस पर16 फरवरी को सुनवाई हुई। ठस दौरान यूनिवर्सिटी ने 16 फरवरी का एक अंतरिम आदेश पेश किया, जिसमें कर्मचारियों को पिछली तारीख से नियमित माना गया है। यूनिवर्सिटी ने कोर्ट को बताया कि नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। सिर्फ एरियर और अन्य लाभों के लिए यूजीसी और शिक्षा मंत्रालय से मार्गदर्शन मांगा गया है। लेकिन, कर्मचारियों का कहना है कि हाईकोर्ट में उन्हें नियमित बताने वाला यूनिवसिर्टी उन्हें व्यक्तिगत रूप से आदेश की कॉपी नहीं दे रहा है। बिना आदेश के न तो उनकी सर्विस बुक सुधर रही है और ना ही उन्हें सातवें वेतनमान का लाभ मिल रहा है। हाईकोर्ट ने दिया 24 अप्रैल तक का समय
हाईकोर्ट ने यूनिवर्सिटी को अब 24 अप्रैल तक का समय दिया है। कहा है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन सभी परिणामिक लाभों का भुगतान सुनिश्चित करे। कर्मचारियों के मुताबिक यूनवर्सिटी केवल समय काटने के लिए मंत्रालय का बहाना बना रहा है, जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद किसी अन्य अनुमति की आवश्यकता नहीं रह जाती।


