सरकारी योजनाएं कागज पर कितनी भी मजबूत क्यों न हों, अगर सिस्टम में एक छोटी-सी चूक रह जाए तो उसका खामियाजा सैकड़ों कर्मचारियों को भुगतना पड़ता है। कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है रांची विश्वविद्यालय में, जहां शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए लागू की जाने वाली स्वास्थ्य बीमा योजना सिर्फ इसलिए महीनों तक अटकी रही, क्योंकि ओटीपी एक ऐसे मोबाइल नंबर पर जाता रहा, जो अब सिस्टम का हिस्सा ही नहीं था। मेडिक्लेम लागू करने की जिम्मेदारी जिस नोडल पदाधिकारी को दी गई थी, उसके बजाय ओटीपी पूर्व कुलपति के मोबाइल पर जा रहा था। हैरानी की बात यह कि पूर्व कुलपति का कार्यकाल पिछले साल जून में ही खत्म हो चुका था, लेकिन उनका मोबाइल नंबर अब भी पोर्टल में रजिस्टर्ड रहा। नतीजा यह हुआ कि लॉगिन नहीं हुआ, यूनिक आईडी नहीं बनी और 844 शिक्षक-कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा के इंतजार में फंसे रहे। 15 जनवरी को विश्वविद्यालय के नामित नोडल पदाधिकारी व फाइनेंशियल एडवाइजर अजय कुमार को पता चला। इसके बाद इसमें सुधार कराया गया और काम शुरू हुआ। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है क्या है पूरा मामला? स्वास्थ्य बीमा लागू करने के लिए विश्वविद्यालय को स्टेट इंप्लायर हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम (एसईएचआईएस) पोर्टल पर अपने सभी शिक्षकों, कर्मचारियों और अधिकारियों का डाटा अपलोड करना था। इसके लिए अधिकृत नोडल पदाधिकारी को लॉगिन आईडी बनानी थी। ओटीपी वेरिफिकेशन से अकाउंट एक्टिवेट करना था, फिर संबंधित कर्मियों की यूनिक आईडी तैयार करनी थी। लेकिन सिस्टम में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर अपडेट न होने के कारण ओटीपी पूर्व कुलपति के नंबर पर ही जाता रहा। चूंकि बिना ओटीपी सत्यापन के लॉगिन संभव नहीं था, इसलिए पूरी प्रक्रिया तकनीकी अड़चन में फंस गई। अब क्या स्थिति है? तकनीकी सुधार के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने 844 शिक्षकों, कर्मचारियों और विवि अधिकारियों की यूनिक आईडी तैयार कर ली है। शनिवार को इन्हें विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड भी कर दिया गया। वेबसाइट से शिक्षक-कर्मचारी अपनी यूनिक आईडी प्राप्त करेंगे। इसके बाद एसईएचआईएस पोर्टल पर जाकर यूजर आईडी पासवर्ड बनाएंगे। इसके बाद व्यक्तिगत व पारिवारिक विवरण भरेंगे और सबमिट करेंगे। 844 कर्मियों को मिलेगा लाभ रांची विश्वविद्यालय के पीजी विभागों, कॉलेजों और मुख्यालय में वर्तमान में 844 शिक्षक, कर्मचारी और विवि अधिकारी कार्यरत हैं, जिन्हें इस योजना के तहत स्वास्थ्य बीमा कवरेज मिलना है। विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि अब मेडिक्लेम योजना लागू करने की दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है और जल्द ही सभी पात्र कर्मियों को लाभ मिलेगा। अन्य विश्वविद्यालयों में क्या जहां आरयू ने तकनीकी बाधा दूर कर प्रक्रिया शुरू कर दी है, वहीं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय समेत अन्य विश्वविद्यालयों में मेडिक्लेम लागू करने की प्रक्रिया अभी लंबित है। डीएसपीएमयू में करीब 90 शिक्षक, कर्मचारी और अधिकारी हैं। वहां जारी कर्मचारियों की हड़ताल के कारण प्रशासनिक कार्य प्रभावित है।


