प्रत्याशियों ने बूथ मैनेजमेंट पर लगाया जोर

निकाय चुनाव के प्रचार का शोर शनिवार शाम पांच बजे पूरी तरह थम गया। 15 दिन तक चले चुनावी शोरगुल के खत्म होने के बाद अब प्रत्याशियों का जोर बूथ मैनेजमेंट एवं पॉकेट मीटिंग पर होगी। प्रत्याशी कार्यालय एवं उनके घरों में देर रात तक समर्थकों एवं कार्यकर्ताओं की भीड़ रही। वोटर की पहचान, पर्चा घर-घर तक पहुंचाने सहित वोटर को कैसे अधिक से अधिक बूथों तक पहुंचाया जाए, इस पर फोकस हो गया है। डोर टू डोर कैंपेन भी जारी रहेगा। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन भाजपा समर्थित प्रत्याशी रोशनी खलखो के समर्थन में शनिवार को भाजपा के बड़े नेता उतरे और जनता का समर्थन भी मांगा। कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी रमा खलखो के समर्थन में भी पार्टी के बड़े नेताओं ने शनिवार को जमकर पसीना बहाया। कांग्रेस नेताओं ने जनसंपर्क अभियान भी चलाया। हातमा, नीचे टोला, रिम्स में डॉक्टरों से मुलाकात, झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स के साथ बैठक, लटमा और साकेत नगर हिनू में मैराथन बैठकों का आयोजन किया गया। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, पूर्व मंत्री बंधु तिर्की, महानगर अध्यक्ष कुमार राजा समेत कई अन्य नेताओं ने मीटिंग भी की। झामुमो समर्थित प्रत्याशी सुजीत विजय आनंद कुजूर के समर्थन में पार्टी नेताओं ने भी ताकत झोंकी। अन्य मेयर प्रत्याशियों सहित वार्ड पार्षद के सभी उम्मीदवारों ने भी दम लगाया। प्रत्याशियों की गोलबंदी शुरू, सहयोग के लिए बना रहे दबाव रांची के मेयर की कुर्सी हासिल करने के लिए शनिवार को सुबह से रात तक बड़े नेताओं की कैंपेनिंग चलती रही। मेयर उम्मीदवारों के लिए वार्ड पार्षद प्रत्याशी ही आखिरी उम्मीद की किरण हैं। क्योंकि, पार्षद प्रत्याशियों के चेहरे पर ही अधिक से अधिक वोटर घरों से निकलेंगे। इसलिए मेयर प्रत्याशियों ने पार्षद प्रत्याशियों की गोलबंदी शुरू कर दी है। मेयर उम्मीदवारों के साथ अब पार्टी के बड़े नेता भी पार्षद प्रत्याशियों पर सहयोग के लिए दवाब बना रहे हैं। क्योंकि, मेयर प्रत्याशियों के जनसंपर्क के लिए भीड़ जुटाने से लेकर बूथ मैनेजमेंट तक पार्षद प्रत्याशियों को दी जा रही है। मेयर प्रत्याशियों ने पूछताछ में इस बात का खुलासा तो नहीं किया कि अभी तक कितने पार्षद प्रत्याशी उनके संपर्क में हैं, लेकिन सभी ने दावा किया कि मतदाता उनके साथ हैं। सभी ने अपनी-अपनी जीत का दावा किया है। रविवार को सभी प्रत्याशी डोर-टू-डोर कैंपे​िनंग में जुट जाएंगे। वोटरों को बाहर निकालना बड़ी चुनौती होगी।

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