भास्कर न्यूज | बालोद जिले के एकमात्र शुगर मिल करकाभाट में 15 से 20 फरवरी तक 6 दिन में सिर्फ 710 टन गन्ने की पेराई हुई है। जिससे 344 क्विंटल शक्कर उत्पादन हुआ। शनिवार को सुबह पेराई होने के बाद गन्ने की कमी होने से ब्रेकडाउन की स्थिति बनी। जिसके बाद से पेराई के साथ मशीनों को भी बंद कर दिया गया है। कितने टन गन्ने की पेराई से कितना क्विंटल शक्कर उत्पादन हुआ। इस संबंध में एक दिन बाद रिपोर्ट जारी किया जाएगा। अनुमान लगाया जा रहा है कि तीन दिन में प्रबंधन की ओर से फाइनल रिपोर्ट जारी कर पेराई सीजन समाप्ति की घोषणा किया जाएगा। दरअसल टोकन जारी कर किसानों को गन्ना बेचने के लिए 20 फरवरी अंतिम तिथि निर्धारित किया गया था। प्रबंधन के अनुसार इस सीजन 762 किसानों ने 36 हजार 711 मीट्रिक टन गन्ना बेचा है। शनिवार सुबह तक की स्थिति में 36 हजार 650 टन गन्ने की पेराई से 36 हजार 844 क्विंटल शक्कर उत्पादन हुआ था। वहीं 22 दिसंबर से 15 फरवरी तक 35 हजार 940 मीट्रिक टन गन्ने की पेराई से 36 हजार 500 क्विंटल शक्कर उत्पादन हुआ था। 6 दिन में एक हजार से कम टन गन्ने की पेराई हो पाई। ब्रेकडाउन की वजह से पेराई प्रभावित भले ही एमडी राजेंद्र राठिया और जीएम जीएल देवांगन करते आ रहे थे कि पर्याप्त मात्रा में गन्ना उपलब्ध हो। इसके लिए बालोद के अलावा दूसरे जिले के किसानों को भी टोकन जारी कर रहें है लेकिन सच्चाई यह है कि जनवरी से अब तक गन्ने की कमी होने से ब्रेकडाउन की स्थिति बनने से पेराई प्रभावित हुआ। उम्मीद अनुरुप शक्कर उत्पादन नहीं हो पाया। जानकारी के अनुसार बालोद व दूसरे जिले के किसान गन्ना बेचने नहीं आ रहें है। प्रबंधन के अनुसार सभी किसान गन्ना बेच चुके है। दो माह में 1422 टन मोलासिस उत्पादन प्रबंधन के अनुसार गन्ना ही नहीं है। किसान भी नहीं ला रहंे है। इस वजह से अब आगे पेराई दोबारा शुरु होने की उम्मीद कम है। पहले जब गन्ने की कमी रहती थी, तब विभागीय अफसर, कर्मचारी दावा करते थे कि जल्द पेराई शुरु हो जाएगी लेकिन अब स्थिति विपरित है। पिछले एक माह से नियमित पेराई नहीं होने के बावजूद रिकवरी रेट पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा। रिकवरी रेट गिरने के बजाय बढ़ते क्रम पर रहा। प्रबंधन स्वीकार कर रही है कि इस बार दूसरे जिले के कम किसानों ने गन्ना बेचा।


