भास्कर न्यूज | रायगढ़ जिले के खनिज खनन से प्रभावित क्षेत्रों और सुदूर वनांचल विकासखंड धरमजयगढ़, लैलूंगा, घरघोड़ा, तमनार के साथ ही मैदानी क्षेत्र रायगढ़, पुसौर और खरसिया के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर अधिक लाभकारी और वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने कलेक्टर ने कृषि विभाग को ठोस कार्ययोजना तैयार कर प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं। धरमजयगढ़ विकासखंड के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ग्राम पुरूंगा पहुंचे। यहां उन्होंने लगभग 35 हेक्टेयर में लगाई गई मक्का और 10 हेक्टेयर में बोई गई उड़द फसल का अवलोकन किया। पूर्व में जहां किसान ग्रीष्मकालीन धान पर निर्भर थे, वहीं इस वर्ष कृषि विभाग के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और फसल प्रदर्शन योजना के तहत किसानों ने फसल विविधीकरण अपनाया है। मक्का उत्पादक किसान उत्तरा पटेल और जनक राम पटेल ने बताया कि उन्होंने 2-2 हेक्टेयर में मक्का बोया है। अन्य किसानों के साथ मिलकर कुल 35 हेक्टेयर में मक्का की खेती की गई है। वर्तमान में मक्का का संभावित बाजार मूल्य 18 से 20 रुपए प्रति किलो मिल रहा है, जिससे किसानों को बेहतर आमदनी की उम्मीद है। कलेक्टर ने कृषि अधिकारियों को एथेनॉल निर्माण से जुड़ी मां मंगला इस्पात प्राइवेट लिमिटेड से समन्वय स्थापित कर किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्पाद का उचित मूल्य सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। इस दौरान कृषि विभाग ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों के अग्रिम उठाव, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग, फसल अवशेष न जलाने तथा प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के तहत सरसों, चना और मसूर को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए सेवा सहकारी समिति छाल और धरमजयगढ़ में पंजीयन कराने की जानकारी दी।


