साहित्यिक विरासत से नई पीढ़ी को जोड़ने का संदेश दिया

लुधियाना। शहर के ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान एससीडी गवर्नमेंट कॉलेज, लुधियाना में महान शायर साहिर लुधियानवी के जीवन पर आधारित संगीतमयी नाटक वो अफसाना का प्रभावशाली मंचन किया गया। कॉलेज के एलुमनाई एसोसिएशन और राब्ता ग्रुप के सहयोग से आयोजित इस प्रस्तुति ने दर्शकों को साहिर के जीवन, उनकी साहित्यिक यात्रा और संस्थान के साथ उनके ऐतिहासिक जुड़ाव से भावनात्मक रूप से जोड़ दिया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रिंसिपल प्रो. (डॉ.) गुरशरण जीत सिंह संधू के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने सभी अतिथियों, पूर्व छात्रों, प्राध्यापकों और उपस्थित छात्रों का अभिनंदन करते हुए कहा कि इस तरह की सांस्कृतिक पहल न केवल संस्थान की गौरवशाली परंपरा को जीवित रखती हैं, बल्कि युवा पीढ़ी को अपने साहित्यिक नायकों से परिचित कराने का सशक्त माध्यम भी बनती हैं। उन्होंने कहा कि साहिर लुधियानवी जैसे रचनाकारों की सोच और संवेदनाएं आज भी समाज को दिशा देने में सक्षम हैं। नाटक वो अफसाना में साहिर लुधियानवी के जीवन के विभिन्न पड़ावों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। राब्ता ग्रुप के कलाकारों ने मंच पर उनके संघर्ष, प्रेम, विचारधारा और रचनात्मकता को सजीव कर दिया। अभिनेता शमीर ने साहिर की भूमिका को गहराई और संवेदनशीलता के साथ निभाया, जिससे दर्शक भावविभोर हो उठे। वहीं प्रख्यात रंगकर्मी एवं शिक्षाविद जयश्री सेठी ने अमृता प्रीतम की भूमिका को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर साहिर और अमृता के भावनात्मक संबंधों को मंच पर जीवंत किया। संगीत ने इस प्रस्तुति को विशेष ऊंचाई प्रदान की। गायिका श्रेया और राजेश कुमार की सजीव गायन प्रस्तुति ने साहिर की रचनाओं को नई ऊर्जा दी और दर्शकों को उस दौर की साहित्यिक संवेदनाओं में ले गई। कॉलेज की छात्रा बिम्मी कश्यप ने अमृता प्रीतम की पुत्री की भूमिका निभाते हुए अपने अभिनय से सराहना बटोरी। आयोजन सचिव प्रो. गीतांजलि पबरेजा ने कलाकारों, एलुमनाई सदस्यों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि एलुमनाई एसोसिएशन की सक्रिय भागीदारी कॉलेज परिवार की एकता और निरंतर जुड़ाव का प्रमाण है। एलुमनाई एसोसिएशन के आयोजन सचिव बृज भूषण गोयल ने भी अपने संबोधन में कॉलेज से जुड़े संस्मरण साझा किए और इसकी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत को निरंतर आगे बढ़ाने पर गर्व जताया। कार्यक्रम का समापन भावपूर्ण वातावरण में हुआ। एलुमनाई, प्राध्यापकगण, छात्र और साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति ने इसे एक यादगार सांस्कृतिक क्षण बना दिया। यह प्रस्तुति केवल एक नाटक नहीं, बल्कि साहिर लुधियानवी की कालजयी रचनात्मकता और कॉलेज के साथ उनके आत्मीय संबंधों को नमन करने का सशक्त माध्यम बनी।

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