बुजुर्ग माता-पिता की सेवा, युवाओं की जिम्मेदारी

लुधियाना। तेजी से बदलती जीवनशैली, नौकरी के लिए दूसरे शहरों की ओर पलायन और व्यस्त दिनचर्या ने परिवारों के स्वरूप को बदल दिया है। संयुक्त परिवारों की जगह अब छोटे परिवारों ने ले ली है, जिससे बुजुर्ग माता-पिता अक्सर अकेलापन महसूस करते हैं। ऐसे में युवाओं की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। विशेषज्ञ मानते ​हैं कि यदि युवा समय रहते अपनी जिम्मेदारी को समझें तो बुजुर्गों का जीवन अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक बन सकता है। बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि संस्कार और मानवीय संवेदना का प्रतीक है। युवा यदि जिम्मेदारी और प्रेम के साथ आगे आएं तो हर घर में बुजुर्ग सम्मान, सुरक्षा और अपनापन महसूस कर सकते हैं। { बुजुर्गों को सिर्फ आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव की भी जरूरत होती है। उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और सामाजिक दायरा सीमित हो जाता है। ऐसे में यदि युवा रोज कुछ समय उनके साथ बैठें, उनकी बातें सुनें और उन्हें निर्णयों में शामिल करें तो उनका आत्मविश्वास बना रहता है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार बातचीत और साथ बिताया गया समय बुजुर्गों में अवसाद की संभावना को कम करता है। {स्वास्थ्य का ध्यान रखना युवाओं की जिम्मेदारी: अक्सर बुजुर्ग अपनी तकलीफों को नजरअंदाज कर देते हैं। नियमित स्वास्थ्य जांच, समय पर दवाइयों की व्यवस्था और संतुलित खानपान सुनिश्चित करना युवाओं का कर्तव्य है। यदि युवा तकनीक का सही उपयोग करें तो ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, मेडिकल रिमाइंडर और स्वास्थ्य रिपोर्टर्स को संभालना आसान हो सकता है। इससे बुजुर्गों को सुरक्षा का एहसास होता है और इलाज में लापरवाही नहीं होती। आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा पर ध्यान: कुछ मामलों में बुजुर्ग आर्थिक रूप से अपने बच्चों पर निर्भर होते हैं। ऐसे में युवाओं को उनकी जरूरतों को समझकर योजना बनानी चाहिए। साथ ही उन्हें सामाजिक गतिविधियों से जोड़ना भी जरूरी है। पास के पार्क में सैर, धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भागीदारी और पुराने मित्रों से संपर्क बनाए रखने में मदद करना उनके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भरता है। {सम्मान और धैर्य है असली सेवा: उम्र के साथ स्वभाव में बदलाव आना स्वाभाविक है। कई बार विचारों का अंतर भी सामने आता है, लेकिन ऐसे समय में धैर्य और सम्मान बनाए रखना ही सच्ची सेवा है। युवा यदि यह समझ लें कि आज जिन माता-पिता ने उनका हाथ थामा, कल उन्हें उनके सहारे की जरूरत होगी, तो परिवार में सामंजस्य बना रहेगा।

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