भास्कर न्यूज | लुधियाना गुरु साहिबानों की तरफ से उच्चारित इलाही बाणी के सिद्धांतात्मक और भावनात्मक संदेश को विश्वभर में निवास कर रही गुरु नानक नाम लेवा संगतों तक पहुंचाने और समूची मानवता को सरब सांझीवालता का संदेश देने के उद्देश्य से अमृत सागर द्वारा लंबे समय से किए जा रहे गुरबाणी कीर्तन के प्रचार-प्रसार के प्रयास अपने आप में मिसाल हैं। यह विचार पंथ की सम्मानित सिंह साहिब ज्ञानी जगतार सिंह, पूर्व हेड ग्रंथी श्री दरबार साहिब अमृतसर ने गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, मॉडल टाउन एक्सटेंशन में 22वें अमृत सागर शुकराना समागम में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में गुरु साहिबानों और भक्तों की शिक्षाओं व दर्शन का अधिक से अधिक प्रचार आवश्यक है, ताकि गुरु नानक देव जी द्वारा लगाई गई सिखी की फुलवारी की महक पूरे संसार में फैल सके। इस अवसर पर पंथ के विद्वान भाई हरपाल सिंह श्री फतेहगढ़ साहिब ने भी संगत के साथ गुरमत विचार साझा करते हुए धर्म में दृढ़ता और पंथक एकजुटता का संदेश दिया। उन्होंने अमृत सागर परिवार के प्रमुख बलबीर सिंह भाटिया और करणप्रीत सिंह भाटिया की तरफ से आयोजित इस समागम को उपदेशात्मक बताते हुए संगत को बाणी और बाणे से जुड़ने की प्रेरणा दी। समागम में भाई तरनवीर सिंह (रब्बी वीर जी), भाई मेहताब सिंह जालंधर वाले, भाई कुलजीत सिंह खालसा, भाई करमजीत सिंह खालसा लुधियाना वाले और बाबा कुंदन सिंह भलाई ट्रस्ट लुधियाना के कीर्तन जत्थों ने हाजिरी भर संगत को गुरबाणी कीर्तन से निहाल किया। इस अवसर पर अमृत सागर कंपनी के प्रमुख सरदार बलबीर सिंह भाटिया, करणप्रीत सिंह भाटिया, गुरुद्वारा साहिब के प्रधान इंदरजीत सिंह मक्कड़ व प्रबंधक कमेटी ने सभी कीर्तन जत्थों, सिंह साहिब ज्ञानी जगतार सिंह, भाई हरपाल सिंह, ज्ञानी अमरजीत सिंह (एडिशनल ग्रंथी श्री हरिमंदिर साहिब), ज्ञानी बलविंदर सिंह (अरदासिया सिंह) को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। सम्मानित करते गुरुद्वारा कमेटी के सदस्य ।


