भगवान की मां ने रात में देखे सोलह स्वप्न, सुबह हुआ तीर्थंकर का जन्म

भास्कर संवाददाता| बांसवाड़ा बाहुबली कॉलोनी में चल रहे पंच कल्याणक महोत्सव के तीसरे दिन शनिवार को तीर्थंकर भगवान का जन्मोत्सव मनाया। इससे पूर्व रात्रि में गर्भ कल्याणक क्रियाएं हुईं। जिसमें चौबीस भगवान के गर्भ कल्याणकों की पूजा एवं अर्घ्य अर्पित किए। नाटिका के माध्यम से भगवान की मां ने रात्रि में देखे सोलह स्वप्नों के फलों को जाना। अष्ट कुमारियों और 56 देवियों ने माता की सेवा तथा श्रंगार किया। सुबह एक साथ चौबीस भगवान का जन्म हुआ। शची इंद्राणी बालक तीर्थंकर को गोद में लेकर खुशी के आंसू बहा रही थी। सोधर्म इंद्रों का भगवान को बार-बार देखने के बाद भी मन नहीं भर रहा था। सोधर्म इंद्र सहित सभी इंद्रों ने भगवान को नगर भ्रमण कराया और पांडुक शिला पर ले जाकर 1008 स्वर्ण कलशों से भगवान का जन्माभिषेक कराया। सुबह भगवान की शांतिधारा का पुण्यार्जन संजय जैन खांदू कॉलोनी को प्राप्त हुआ। जन्माभिषेक का पुण्यार्जन सोधर्म इंद्र राजेश शाह परिवार को मिला। मुनि आदित्य सागर ससंघ का पाद प्रक्षालन प्रतिष्ठा कमेटी के अध्यक्ष अशोक वोरा ने किया। विकाम्या श्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि यह भूमि पवित्र है और साक्षात इंद्रलोक सा नजारा लग रहा है। मुनि आदित्य सागर ने कहा कि जीवन भोग के लिए नहीं योग के लिए है। धर्म सभा में प्रतिष्ठा कमेटी के अध्यक्ष दिनेश खोडनिया, हंसमुख गांधी इंदौर, नरेंद्र खोडनिया, बसंत लाल सराफ, विकेश मेहता सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे। अशोक कोठिया ने बताया कि इस पंच कल्याणक प्रतिष्ठा में वागड़ सहित मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से भी श्रद्धालु शामिल हुए हैं। रविवार को भगवान का तप कल्याणक होगा तथा रात्रि में भजन संध्या का कार्यक्रम होगा।

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