सुजीत मोदी। जयपुर कमिश्नरेट में ट्रैफिक पूरी पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। इसके ट्रैफिक पुलिस के साथ जेडीए और नगर निगम भी जिम्मेदार हैं। इसी के चलते शहर की किसी न किसी सड़क पर रोजाना जाम के हालात रहते हैं। भास्कर ने जब देश के सबसे अच्छे ट्रैफिक मैनेजमेंट वाले शहर बेंगलुरु, चेन्नई और पुणे से जयपुर की तुलना की तो हम बहुत पिछड़े हुए नजर आए। इन शहरों में एआई बेस्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट है। वहां सिग्नल ट्रैफिक दबाव के हिसाब से खुद टाइम बदलते हैं। बेंगलुरु में तो जयपुर ट्रैफिक पुलिस की नफरी की तुलना में चार गुना ज्यादा पुलिसकर्मी हैं। वहां ज्वाइंट कमिश्नर के साथ 4 डीसीपी हैं तो जयपुर में सिर्फ एक। चेन्नई में एडिश्नल कमिश्नर के साथ ही 2 डीसीपी हैं। बेंगलुरु-चेन्नई में AI बेस्ड एडवांस्ड सिस्टम जयपुर ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए एआई इंटीग्रेशन और रोड सेफ्टी पर फोकस है, लेकिन यह अभी शुरुआती स्टेज में है। एआई-बेस्ड ट्रैफिक सिग्नल्स, नाइट-विजन कैमरा, फेस डिटेक्शन और जीपीएस-इनेबल्ड ई-रिक्शा से कंजेशन कम और सेफ्टी बढ़ाई जा रही है। 2 हजार से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे हाईवेज और सिटी में मॉनिटरिंग को लगाए हैं। 100 करोड़ के सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्लान है। वन-वे, नो-पार्किंग जोन से हैंडल कर रहे हैं। बेंगलुरु में एआई बेस्ड प्रोडक्टिव सिस्टम्स सबसे एडवांस्ड हैं। वहां बीएटीसीएस एआई सिग्नल 165 चौराहों पर हैं। ये अपना सिग्नल खुद बदलता है। इससे ट्रेवल टाइम 17 से 20% कम हो जाता है। ड्रोन से लाइव जानकारी मिलती रहती है। मोबिलिटी प्लान 20-30 साल के लिए बनाया गया है। सेंट्रल कंट्रोल रूम से प्रायोरिटी लेन और अपडेट्स मिलते हैं। चेन्नई कंट्रोल रूम पूरी तरह एआई बेस्ड हैं। वहां एआई एडाप्टिव सिग्नल्स और इंफ्रा अपग्रेड्स से स्मार्ट मोबिलिटी पर जोर है। 165 जंक्शन पर एआई-बेस्ड सिग्नल, जो रीयल-टाइम वाहनों का दबाव देखकर ग्रीन टाइम (30-120 सेकंड) ऑटो एडजस्ट करते हैं। सेंसर्स, एआई कैमरों से वाहनों को क्लासिफाई किया जाता है और इसी से स्पीड/सीट बेल्ट के चालान बन रहे हैं। इमरजेंसी वाहनों के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं।


