बिजली कटौती से लोग परेशान:इस बार भी गर्मी में बिजली की समस्या झेलेंगे 6 लाख उपभोक्ता

शहर के 6 लाख उपभोक्ता इस बार भी गर्मी के मौसम में बिजली गुल होने की समस्या झेलेंगे। इसका कारण घासा में बन रहा 400 केवी ग्रिड सबस्टेशन (जीएसएस) का अधूरा काम है। शहर में बढ़ती बिजली की खपत को देखते हुए 10 साल पहले इस जीएसएस का प्रोजेक्ट बना था, लेकिन इसका काम अब तक पूरा नहीं हो सका है। अब बिजली निगम का कहना है कि अगले साल मार्च तक इस ग्रिड का काम पूरा हो पाएगा। उसके बाद ही लोगों को बिजली की समस्या से निजात मिल सकेगी। ऐसे में शहरवासी इस बार भी 4 माह तक परेशान होंगे। अभी शहर में बिजली आपूर्ति का लोड मुख्य रूप से चीरवा (अंबेरी) और देबारी ग्रिड पर है। इस ग्रिड की क्षमता 220 केवी है और अभी ठंड के दिनों में ही शहर में बिजली की औसत खपत करीब 250 मेगावॉट है, जो गर्मी में 350 मेगावॉट तक पहुंच जाएगी। ऐसे में इस जीएसएस पर बार-बार लोड बढ़ने से बिजली फॉल्ट की समस्या हो रही है। शनिवार को ही शहर के कई इलाकों में बिजली गुल रही। गत मंगलवार को भी फतहपुरा, अंबेरी, लेकसिटी मॉल सहित आधे शहर में बिजली बाधित रही। चीरवा-देबारी ग्रिड की क्षमता कम, बार-बार होते हैं फॉल्ट पुराने कंडक्टर और लाइनों के कारण चीरवा और देबारी ग्रिड की क्षमता कम पड़ जाती है। इससे बार-बार ट्रिपिंग और फॉल्ट की समस्या होती है। यह समस्या गर्मी में और बढ़ेगी। यही वजह है कि हर साल गर्मी में बिजली गुल की रोजाना औसत 11 हजार शिकायतें आती हैं। निगम का कहना है कि घासा में 400 केवी जीएसएस का काम पूरा होने के बाद ही चीरवा और देबारी ग्रिड का लोड कम होगा। असर: पर्यटक भी झेलते हैं परेशानी, खराब होती है छवि उदयपुर दुनियाभर में पर्यटन सिटी के रूप में प्रसिद्ध है। अभी होली पर लाखों की संख्या में पर्यटक यहां घूमने आएंगे। इसके अलावा गर्मी में पर्यटकों की आवाजाही रहेगी। ओल्ड सिटी में कई होटल ऐसे हैं, जहां जनरेटर रखने की जगह तक नहीं है। ऐसे में बार-बार फॉल्ट से बिजली बाधित रहती है, जिससे पर्यटकों को परेशान होना पड़ता है। इससे शहर की छवि भी खराब होती है। जिन स्थानों पर जनरेटर हैं, वहां तो अस्थायी समाधान हो जाता है, लेकिन जनरेटर चलाने से प्रदूषण फैलता है। 400 केवी इसलिए जरूरी 400 केवी बहुत उच्च क्षमता की लाइन होती है। इससे बड़ी मात्रा में बिजली एक साथ शहर में लाई जा सकती है। इससे नीचे के 220 केवी और 132 केवी स्टेशनों पर दबाव कम होता है। अभी शहर में मुख्य रूप से 220 केवी जीएसएस पर लोड है। जब मांग गर्मी में 350 मेगावॉट तक पहुंचती है तो परेशानी और बढ़ जाती है। इसलिए 400 केवी जीएसएस जरूरी है। रिकॉल : पिछले साल पांच बार हुआ था ब्लैक आउट गत वर्ष 5 बार ब्लैक आउट की स्थिति बनी थी। इसमें एक सप्ताह में दो बार ब्लैक आउट हुआ था। इसके चलते शहरवासियों को 5 घंटे तक अंधेरे में रहना पड़ा था। मादड़ी जीएसएस से संबंधित 220 केवी लाइन में फॉल्ट के बाद आग तक लग गई थी। गत 18 अप्रैल को नेशनल हाईवे-8 स्थित अमरखजी महादेव मंदिर से सटी पहाड़ियों में लगी आग के बाद अंबेरी 220 केवी जीएसएस में फॉल्ट आ गया था। इससे वॉल सिटी से लेकर उपनगरीय इलाकों के 30 हजार घरों में बिजली गुल रही थी। दरीबा-मेनार में भी 220 केवी जीएसएस बना रहे “घासा में बन रहा 400 केवी ग्रिड का कार्य जारी है। मार्च 2027 तक कार्य पूरा होगा। इसके अलावा दरीबा-मेनार में 220 केवी जीएसएस का निर्माण भी चल रहा है। वल्लभनगर-नाथद्वारा से सिटी के लिए नई लाइन बन रही है। इन प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद बिजली में ट्रिपिंग की समस्या से राहत मिलेगी।”
— के.आर. मीणा, एसई, बिजली निगम

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