प्रधानमंत्री पोषण मिड-डे मील योजना के तहत प्रदेश के विद्यालयों में परोसे जाने वाले भोजन की तैयारी, भंडारण और वितरण की पूरी प्रक्रिया भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के मानकों के अनुरूप होगी। भोजन वितरण से पूर्व संबंधित शिक्षक और विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) के एक सदस्य को भोजन चखना जरूरी रहेगा। दोनों को निर्धारित रजिस्टर में टिप्पणी और हस्ताक्षर दर्ज करने होंगे। इसके बाद ही भोजन बच्चों को परोसा जाएगा। अनाज, दाल, तेल और मसालों की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। राज्य सरकार ने खाद्य विषाक्तता और संक्रमण रोकने के लिए ‘फाइव कीज टू सेफ फूड’ स्वच्छता, कच्चे-पके भोजन का पृथक्करण, सही ढंग से पकाना, सुरक्षित तापमान और सुरक्षित पानी को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए हैं। रसोई सहायकों के लिए ड्रेस कोड व प्रशिक्षण कुक-कम-हेल्पर के लिए कार्य के दौरान साफ वर्दी, एप्रन और हेड-कवर पहनना अनिवार्य होगा। व्यक्तिगत स्वच्छता, जैसे कटे हुए नाखून आदि, का पालन करना भी जरूरी रहेगा। उनके नियमित मेडिकल चेकअप और एफएसएसएआई आधारित प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। भोजन की गुणवत्ता की जांच समय-समय पर एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं से कराई जाएगी। योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एसएमसी को भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और भुगतान व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। समिति के सदस्य अपनी टिप्पणियां रजिस्टर में दर्ज करेंगे। जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारी नियमित निरीक्षण करेंगे। कमी मिलने पर तत्काल करेंगे कार्रवाई
“अब स्कूलों में परोसे जाने वाले भोजन पर एफएसएसएआई के नियम लागू होंगे। किसी भी तरह की कमी मिलने पर तत्काल कार्रवाई करेंगे। यह बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है, इसलिए नियमों को कठोरता से लागू किया जा रहा है।”
-डॉ. लोकेश भारती, जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक)


