शहर के श्री मथुराधीश मंदिर कॉरिडोर के पहले चरण का शिलान्यास रविवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया। यह मंदिर वल्लभ संप्रदाय पुष्टिमार्ग की प्रथम पीठ है। प्रोजेक्ट में कॉरिडोर में सड़कों को चौड़ा करने, मंदिर-परिक्रमा मार्ग के सौंदर्याकरण, पार्किंग सुविधा, यात्रियों के ठहरने के लिए होटल बनाने पर 66.25 करोड़ रुपए खर्च होंगे। जिसमें पहले चरण के लिए 18.24 करोड़ के सिविल कार्य प्रस्तावित किए हैं। रोड चौड़ा करने, सौंदयीकरण करने में आ रहे मकानों व दुकानों, धर्मशालाएं व मंदिर परिसर की जमीन के अधिग्रहण पर करीब 30 करोड़ रुपए और सौंदर्याकरण पर 36.25 करोड़ रुपए का खर्च होंगे। वर्तमान में मंदिर पुराने शहर में पाटनपोल मुख्य बाजार के बीच है। परिक्रमा मार्ग में घनी रिहायशी बसावट है। मंदिर एक ओर से परकोटा दीवार के साथ बना हुआ है, इस कारण मंदिर और परिक्रमा मार्ग काफी संकरा है। मंदिर के आसपास पुरानी जर्जर इमारतें हैं, जिनके ग्राउंड फ्लोर पर व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। पहुंच मार्ग संकरा होने से दर्शन के समय यातायात बाधित रहता है। पार्किंग भी नहीं है। पहले चरण में मंदिर को रिवर फ्रंट से जोड़ने के लिए करीब 200 मीटर लंबा और 40 फीट चौड़ा एलिवेटेड रोड बनेगा। पहले यह एलिवेटेड रोड मंदिर से भट्टजी घाट की पुलिया तक ही प्रस्तावित था, अब इसे रिवर फ्रंट के गणेश पोल घाट तक बढ़ाया है। इससे मंदिर और रिवर फ्रंट के बीच एक नया कनेक्टिंग कॉरिडोर विकसित हो जाएगा। एलिवेटेड रोड के नीचे भी सड़क चौड़ी की जाएगी। सामान्य दिनों में मथुराधीश जी के दर्शन करने के लिए करीब 1 हजार भक्त आते हैं। रविवार और अन्य अवकाश वाले दिनों में भक्तों की संख्या 3-4 हजार पहुंच जाती है। मंदिर के पीछे स्थित नामदेव धर्मशाला से भट्टजी घाट तक सड़क को 40 फीट और परिक्रमा मार्ग को 6 से 12 मीटर चौड़ा किया जाएगा। इसके बाद गढ़ पैलेस स्थित साई बाबा मंदिर से सीधे मंदिर तक आवागमन सुगम हो जाएगा। दोनों काम के लिए 23 मकानों व मंदिर की लगभग 15 हजार वर्गफीट भूमि का अधिग्रहण होगा। पहले चरण के बाद टिपटा चौराहा भूरिया गणेशजी मंदिर से पाटनपोल दरवाजे व परिक्रमा मार्ग का हैरिटेज लुक में सौंदर्याकरण प्रस्तावित है। धार्मिक विरासत के साथ आधुनिक विकास जरूरी- ओम बिरला
लोकार्पण के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि आज हमारे लिए दिव्य उत्सव का दिन है। प्रथम पीठ मथुराधीश मंदिर की परिक्रमा मार्ग और सबकी आस्था, विश्वास उर्जा आध्यात्मिक चेतना का यह मथुराधीश मंदिर निश्चित रूप से आने वाले समय में देश और दुनियां के धर्मिक पर्यटनों के लिए विशेष आस्था का केन्द्र बनेगा। इस परकोटे के जो बाजार, जो हमारी विरासत है, जिस गलियों के अंदर हम सबने अपने जीवन को बिताया है आज समय आ गया है कि हम इस परकोटे की विरासत को रखते हुए वर्तमान जरूरत को देखते हुए इसके आधुनिकता की ओर बढे़। इसलिए हम सबके आस्था विश्वास और उर्जा का ये केन्द्र मथुराधीश मंदिर जहां पर देश और दुनियां के भक्त आते है, आज इसके आध्यात्मिक उर्जा और हमारे आस्था के केन्द्र मंदिरों के पुर्ननिर्मण का समय आ गया है। ऐसे समय में जब देश का पुर्नविकास हो रहा हो, आस्था के केन्द्रों का पुर्नविकास किया जा रहा है तो भारत की वल्लभ संप्रदाय की प्रथम पीठ मथुराधीश का विकास कैसे रोक सकते थे। मथुराधीश की परिक्रमा मार्ग में, मंदिर का पुर्नविकास भी जरूरी है। मंदिर के अंदर का जो क्षेत्र है, यहां के महंत, लोगों से चर्चा कर उसका विकास किया जाएगा। हम यहां विरासत भी रखना चाहते हैं लेकिन जरूरत के अनुसार विकास भी होना चाहिए। इसी के साथ श्रीनाथ चौकी, केश्वरायभगवान का मंदिर समेत कोटा के आस्था के केन्द्र जो हैं उनका भी पुर्नविकास होगा।


