साइबर सुरक्षा पर तीन दिवसीय सेमिनार का समापन आज:जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा- AI और टेक्नोलॉजी हमारी सुविधा के लिए है, इनके बंधक न बनें

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने कहा है कि आज के दौर में डिजिटल टेक्नोलॉजी के बिना आगे नहीं बढ़ा जा सकता। इससे आमजन को भी काफी सुविधा हुई है। लेकिन एआई हो या अन्य कोई तकनीक, यह हमारी सुविधा के लिए होनी चाहिए। हम उसके इतने आदी या बंधक न बन जाएं कि निजी कामों में भी उससे पूछने लगें कि अब क्या करना है। ऐसा होना भयानक होगा।वे राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) की ओर से आयोजित ‘साइबर सुरक्षा व जागरूकता और न्याय तक पहुंच’ विषयक राष्ट्रीय सेमीनार के दूसरे दिन तकनीकी सत्र को संबोधित कर रहे थे। सेमीनार के तीनों तकनीकी सत्रों में साइबर अपराधों के मूल स्वरूप, डिजिटल वित्तीय लेनदेन और उनके प्रभावों पर विस्तार से चर्चा हुई। तीन दिवसीय सेमीनार का समापन रविवार को होगा। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पी.बी. वराले ने देश में बढ़ते साइबर अपराधों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी चुनौती नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। साइबर अपराध हमारे समय की बड़ी चुनौतियों में से एक है, लेकिन यही चुनौती न्यायिक और सामाजिक तंत्र को नए रूप में ढालने का अवसर भी देती है। उन्होंने कहा कि हमें प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि पूरी तरह निवारक दृष्टिकोण अपनाना होगा। मेरे साथ भी साइबर फ्रॉड हुआ 0.17 प्रतिशत मामलों में ही वित्तीय धोखाधड़ी दर्ज जस्टिस आनंद पाठक ने ‘शोले’ से समझाया साक्ष्य संकलन

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