राजस्थान धरोहर प्राधिकरण:महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट 1 साल बाद धरातल पर, सर्वे आज से

महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट प्राेजेक्ट साल बाद धरातल पर उतरते दिखाई दे रहा है। प्रदेश सरकार ने महाराणा प्रताप से जुड़े पर्यटन स्थलाें के विकास के कार्याें काे लेकर सर्वे शुरू कर दिया है। काॅन्सेप्ट प्लान और प्राइमरी रिपाेर्ट बनाने के लिए गुड़गांव की फर्म काे 6.30 लाख रुपए का टेंडर जारी करके वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया है। कंपनी के आर्किटेक्ट सोमवार से राजस्थान धराेहर विकास प्राधिकरण के सदस्याें के साथ मिलकर महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़े ​स्थान चावंड, हल्दीघाटी, गोगुंदा, कुंभलगढ़, दिवेर और उदयपुर का दाैरा करेंगे।
इसमें पर्यटन स्थलाें काे विकसित करने, नई सुविधाएं तैयार करने, पर्यटन स्थलाें पर नए आकर्षण का केंद्र बनाने आदि कार्याें का प्लान तैयार हाेगा। पर्यटकाें के लिए सुविधाएं विकसित होंगी, इतिहास संवारेंगे, कनेक्टिविटी सुधरेगी महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट में जुड़े स्थानों पर पर्यटकों के लिए सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके साथ ही इतिहास काे संवारने का काम का हाेगा। इन स्थानों की कनेक्टिविटी में सुधार किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि इन पर्यटन स्थलाें काे इस तरह से विकसित किया जाए कि दुनियाभर के पर्यटक इन्हें देखने केे लिए आएं। बता दें कि वर्ष 2024 में सरकार ने अंतरिम बजट में महाराणा प्रताप के जीवनकाल से जुड़े विभिन्न ​स्थानों को शामिल करते हुए टूरिस्ट सर्किट के रूप में विकसित करने की घाेषणा की थी। इस पूरे प्रोजेक्ट पर 100 करोड़ रुपए का खर्च किए जाएंगे। उदयपुर-राजसमंद और सलूंबर के स्थान आपस में जुड़ेंगे
राजस्थान धराेहर प्राधिकरण के अध्यक्ष औंकार सिंह लखावत ने बताया कि महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट में पहले चरण में उदयपुर, सलूंबर और राजसमंद की 5 जगहाें काे विकसित किया जाएगा। इसमें दिवेर, हल्दीघाटी, गाेगुंदा, चावंड, हल्दीघाटी आदि जगह शामिल हैं। इसके लिए माैका मुआयना किया जाएगा। इसके तहत विकास के लिए रिपोर्ट बनाई जाएगी।

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