राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाकर जिन्दगी को बचाना अब और आसान हो जाएगा। चिकित्सा विभाग प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों पर संचालित 129 एम्बुलेंसों का 108 एम्बुलेंस से इंटीग्रेट करने की तैयारी कर रहा है। इंटीग्रेटेड हाेने के बाद नेशनल हाईवे पर हाेने वाले सड़क हादसा में माैके पर एनएचएआई की एंबुलेंस पहुंच सकेगी। अभी एनएचएआई की एंबुलेंस के लिए 1033 नंबर डायल करना हाेता है, लेकिन इसकी जानकारी बहुत कम लाेगाें काे ही है। लाेग एंबुलेंस के लिए 108 पर डायल करते हैं। एनएचएआई की एंबुलेंस 108 से जुड़ी हुई नहीं है। ऐसे में नजदीकी एनएचएआई की एंबुलेंस काे सूचित नहीं किया जा सकता और हादसा वाली जगह पर 108 एंबुलेंस भेजा जा रहा था, जिसे पहुंचने में समय लगता था। अब इंटीग्रेटेड हाेने पर यदि हाईवे पर हादसा हाेता है और 108 नंबर पर सूचना आती है ताे नजदीकी एनएचएआई की एंबुलेंस काे सूचित किया जाएगा। इसके बाद सबसे नजदीक खड़ी एनएचएआई की एम्बुलेंस के जरिए घायलों को अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा। इससे रिस्पॉन्स टाइम घटेगा और घायल काे जल्द इलाज मिल सकेगा। ये एनएच होंगे एक्सीटेंड जोन फ्री
सरकार ने बजट में दिल्ली-जयपुर, जयपुर-आगरा और जयपुर-कोटा हाईवे को जीरो एक्सीडेंट जोन बनाने की घोषणा की है। इन दोनाें एनएच पर हर साल करीब 500 से अधिक हादसा होते हैं, जिनमें 200 लोगों की मौत होती है। शुरुआती फेज में दुर्घटना संभावित चिह्नित करीब 50 ब्लैक स्पॉट को ठीक किया जाएगा। पीपीपी मोड पर 20 ट्रोमा सेन्टर बनाने की 50 करोड़ रुपए की योजना प्रस्तावित है। इसके अलावा 25 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस और संचालित करने की योजना है। “इमरजेंसी के दौरान मरीज का समय पर अस्पताल पहुंचना गोल्डन आवर माना जाता है। सही समय और बेड मिलने के बाद ऑक्सीजन व ड्रीप लगने पर कुछ हद तक मृत्यु दर को रोका जा सकता है। ब्रेन स्ट्रॉक, हार्ट अटैक जैसी इमरजेंसी में नजदीक के अस्पताल में 8 से 10 मिनट में पहुंचने पर मरीज को बचाया जा सकता है।”
-डॉ.अनुराग धाकड़, प्रभारी, एसएमएस ट्रोमा सेन्टर


