मैं अपने 2 साल के बच्चे को लेकर सड़क पर रह रही हूं। सिर पर छत नहीं रही। जेसीबी से घर अचानक तोड़ दिया गया, सामान निकालने तक का मौका नहीं दिया। हमने हाथ-पैर भी जोड़े, कहा- कुछ तो रहम कर दो। कम से कम दो दिन की मोहलत तो दे दो। सोचने का मौका तो दे दो कहां जाएं, लेकिन एक नहीं सुनी। यह दर्द उस महिला का है, जिसका घर बाकी तीन दिन पहले रीवा नगर निगम की टीम ने बिना किसी लिखित नोटिस गिरा दिया। आशियाना उजड़ने के बाद वह परिवार समेत सड़क पर गुजारा करने को मजबूर है। महिलाओं का कहना है कि बच्चों के एग्जाम तो हो जाने देते। अब बच्चे कहां पढ़ेंगे। निगम ने सड़क किनारे बने पक्के मकान गिराए
रीवा शहर के चिरहुला कॉलोनी में नगर निगम ने गुरुवार से सड़क किनारे बने 40 घरों को गिराने की कार्रवाई शुरू की। इससे पहले बुधवार शाम इलाके में मुनादी कराई। गुरुवार सुबह नगर निगम का अमला जेसीबी मशीनों और भारी पुलिस बल के साथ पहुंचा और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। शुक्रवार-शनिवार तक देखते ही देखते 40 घर जमींदोज कर दिए गए। अधिकांश मकान पक्के बने थे। इधर, निगम का कहना है कि सभी घर अतिक्रमण की श्रेणी में थे। उन्हें तोड़ने के लिए सभी वैधानिक प्रक्रियाएं की गई हैं। एक दिन पहले भी मुनादी कराई गई थी। जबकि बेघर हुए लोगों का कहना है कि हमें इतना भी समय नहीं दिया गया कि अपना सामान निकाल सकें। निगम कर्मचारियों ने सामान घरों से बाहर फेंक दिया। बेघर हुए लोगों ने रोते हुए भास्कर के साथ अपनी आपबीती साझा की… पहले देखिए, निगम की कार्रवाई की तीन तस्वीरें आरोप- किसी को नोटिस तक नहीं दिया
निगम ने दिलीप कुमार वर्मा का भी मकान तोड़ा है। दिलीप ने बताया कि मेरे घर और आसपास में बने बड़ी संख्या में घरों को गिराया गया है। लेकिन किसी को लिखित नोटिस नहीं दिया गया है। जबकि प्रक्रिया के तहत सबसे पहले नोटिस देना चाहिए था। केवल एक दिन पहले रात में मुनादी करवाई गई। दूसरे दिन से अचानक आकर घरों को गिराना शुरू कर दिया गया। जेसीबी से हमारे आशियाने उजाड़ दिए। एक बार के लिए भी नहीं सोचा कि अब हम सब कहां जाएंगे? हम लोग हर जगह मदद की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हो रही। महिला के हाथ-पैर सुन्न पड़े
आरती जायसवाल ने कहा कि मैं तो कैसे भी सड़क पर रह लूं, लेकिन छोटे से बच्चे को कैसे रहने दूं? बच्चे की तबीयत बिगड़ गई है। उसे तेज बुखार है। बुखार की वजह से उसकी हालत खराब हो गई है। अब मैं भला क्या करूं? बच्चे को कैसे बताऊं कि तुम्हारी मां इतनी मजबूर है कि वो कुछ भी नहीं कर सकती। गरीब तो पहले से ही थे लेकिन अब तो रहने के लिए घर भी नहीं रहा। एक अन्य महिला आशिया परवीन ने कहा कि मुझे शुगर और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है। पहले तो निगम के लोगों ने आकर हमसे झूठ बोला। उन्होंने कहा कि बस बाहर का कुछ हिस्सा तोड़ेंगे। लेकिन जब अचानक जेसीबी लेकर खड़े हो गए। कहने लगे कि पूरा का पूरा घर गिराएंगे। अब जब अचानक से कोई आपके घर के बाहर जेसीबी और बुलडोजर लेकर खड़ा हो जाए तो आप भला क्या कर पाएंगे? पहले ही मैं दवाई में बहुत सारा पैसा खर्च कर चुकी हूं। खराब तबीयत से भी परेशान हूं। अब यह सब सुनकर और देखकर दोबारा से बीपी बढ़ गई है और हाथ पैर सुन्न पड़ गए हैं। रोते हुए महिला बोली- मैं आत्महत्या कर लूंगी
महिला सुनीता जायसवाल रोते हुए बोलीं कि मैं आत्महत्या कर लूंगी, इस बात को कैमरे में रिकॉर्ड कर लीजिए। अगर मैं भविष्य में आहत होकर कोई भी कदम उठाती हूं तो उसके लिए नगर निगम और प्रशासन जिम्मेदार होगा। सुनीता ने बताया, हमने कहा कि घर की बिजली मत काटो। बिजली काट दोगे तो अंधेरे में सामान कैसे निकालेंगे। लेकिन सामान निकालने तक की मोहलत नहीं दी। पहले फटाफट बिजली कनेक्शन काटा और फिर घरों को गिराया जाने लगा। बच्चों की परीक्षाएं हैं, वे पढ़ाई-लिखाई कैसे करेंगे?
संगीता साकेत ने कहा, मेरे तीन बच्चे हैं। सभी स्कूल में अलग-अलग कक्षाओं में पढ़ते हैं। उनकी परीक्षा होने वाली है। बच्चों के फाइनल एग्जाम से पहले हमारे घर गिरा दिए गए। आखिर अब बच्चे पढ़ाई-लिखाई कैसे करेंगे? कम से कम महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के बारे में तो थोड़ा तो सोच लिया होता। हम 50 सालों से यहां पर रह रहे हैं। निगम आयुक्त बोले- अतिक्रमण के दायरे में था निर्माण
नगर निगम आयुक्त सौरभ संजय सोनवड़े का कहना है कि बाहर से आकर लोग बहुत सालों से बसे थे। पहले दिन में अतिक्रमण के लगभग 25 और बाकी घर दूसरे दिन गिराए गए हैं। खबर में पोल पर अपनी राय दे सकते हैं।


