4-4 शहरों को मिलाकर भोपाल और इंदौर बनेंगे महानगर:रियल एस्टेट समेत कृषि और ग्रामीण विकास में मदद मिलेगी, मेट्रो का विस्तार होगा

उज्जैन, देवास, इंदौर और धार को मिलाकर एक महानगर बनेगा। इसी तरह भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा और राजगढ़ को मिलाकर हम दूसरा महानगर बनाएंगे। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ये घोषणा गणतंत्र दिवस के मौके पर की थी। इसके साथ मुख्यमंत्री ने अफसरों को इस साल के आखिर तक इंदौर-भोपाल के मेट्रोपॉलिटन प्लान को अंतिम रूप देने के निर्देश भी दिए थे। सीएम की घोषणा के बाद इंदौर को महानगर बनाने के लिए तेजी से काम शुरू हुआ है, मगर भोपाल पिछड़ गया है। इंदौर में कंसल्टेंट की नियुक्ति हो गई है। कंसल्टेंट ने इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (IMR) का प्रारंभिक ड्राफ्ट भी तैयार कर लिया है। ये सारी कवायद सिंहस्थ 2028 को देखते हुए की गई है। वहीं, भोपाल की बात की जाए तो यहां किसे कंसल्टेंट बनाया जाए, उसे लेकर अफसरों की एक मीटिंग हो चुकी है। इंदौर-भोपाल को मेट्रोपॉलिटन सिटी बनाने की कवायद 2006 से चल रही है, लेकिन पिछली सरकारें इसे लेकर ज्यादा गंभीर नहीं रहीं। इस बार अधिकारियों का दावा है कि 9 महीने में ही दोनों शहरों का प्लान तैयार हो जाएगा। मेट्रोपॉलिटन एरिया में कौन-कौन से क्षेत्र आएंगे और इसका स्वरूप क्या होगा, इससे आमजन और छोटे शहरों को क्या फायदा होगा…पढ़िए रिपोर्ट जानिए, इंदौर मेट्रोपॉलिटन के बारे में 5 पॉइंट में समझिए, अब तक क्या हुआ 5 पॉइंट्स में जानिए, क्या बाकी है भोपाल का काम ही शुरू नहीं
इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन बनाने का काम बेहद तेजी से चल रहा है। इसके मुकाबले भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन का कोई काम ही शुरू नहीं हुआ है। पिछले साल सितंबर के महीने में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल जिले के विकास कार्यों की समीक्षा की थी। उस दौरान उन्होंने हाउसिंग बोर्ड, भोपाल विकास प्राधिकरण और स्मार्ट सिटी एजेंसी को प्लान तैयार करने के लिए कहा था। साथ ही भोपाल को झुग्गीमुक्त बनाने की भी बात हुई थी। इससे पहले 2022 में शिवराज सरकार ने भोपाल में मेट्रो रेल प्रोजेक्ट को मंडीदीप तक विस्तार करने के लिए मेट्रोपॉलिटन एरिया के प्रस्ताव को कैबिनेट बैठक में मंजूरी दी थी। उस वक्त भोपाल मेट्रोपॉलिटन का प्रारंभिक एरिया डिफाइन किया गया था, जिसमें भोपाल की 59 ग्राम पंचायतें और मंडीदीप निवेश क्षेत्र (रायसेन) की 9 ग्राम पंचायतें शामिल की गई थीं। फिलहाल, इनमें कौन से नए एरिया जुड़ेंगे? कितने जिलों की पंचायतें इसमें शामिल होंगी? इसे लेकर अभी कोई स्थिति साफ नहीं है। न ही इसका कोई प्रस्ताव तैयार हुआ है। इंदौर में तेजी से काम की वजह
इंदौर मेट्रोपॉलिटन के तेजी से हो रहे काम की वजह है सिंहस्थ 2028। दरअसल, इंदौर का जो एरिया तय हुआ है, उसमें दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) को जोड़ा गया है। सरकार की कोशिश है कि इससे उद्योगों और व्यापार को नई गति मिल सके। इससे देवास, पीथमपुर, उज्जैन और बदनावर जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही इंदौर, देवास और अन्य शहरों को मजबूत सड़क, रेल और हवाई मार्गों से जोड़ा जाएगा ताकि सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी। प्रोग्रेसिव स्टेट के लिए ऐसे कदम जरूरी
क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज सिंह मीक कहते हैं, ‘सरकार ने टाउनशिप पॉलिसी लागू की है। इस पॉलिसी को जमीन पर उतारना है तो बड़े एरिया की जरूरत पड़ेगी। अभी कई विभागों से अनुमतियों की जरूरत होती है। विभागों के बीच आपसी को-ऑर्डिनेशन नहीं होता। मेट्रोपॉलिटन रीजन अथॉरिटी में जुड़ने के बाद छोटे शहरों को फ्लोर एरिया रेशो की दर, टीओडी और टीडीआर पॉलिसी का फायदा मिलेगा। इसके अलावा स्मार्ट सिटी, पेन सिटी सॉल्यूशन के काम और मेट्रो रेल सेवा का फायदा मिलेगा। इसका सीधा असर औद्योगिकीकरण और रोजगार में इजाफे के तौर पर दिखाई देगा। किसी सामान्य क्षेत्र को यदि स्टेट कैपिटल रीजन के रूप में विकसित किया जाता है तो इसका पहला असर इस क्षेत्र के रियल स्टेट पर पड़ता है। इसके बाद नए इंडस्ट्रियल एरिया डेवलप किए जाते हैं। अब जानिए, आगे की प्रोसेस सिचुएशन एनालिसिस का ड्राफ्ट बनेगा
मेट्रोपॉलिटन एरिया बनाने के लिए इसमें शामिल जिलों की अलग-अलग तहसील, निकायों का डेटा, वहां की जनसंख्या, स्थापित उद्योग, क्षेत्र की विशेषता की स्टडी होगी। पहले एक सिचुएशन एनालिसिस का ड्राफ्ट बनेगा। इसके बाद वहां की भौगोलिक, आर्थिक, धार्मिक-सामाजिक स्थिति का आकलन होगा। कहां कौन सी इंडस्ट्री है, किस तरह की जरूरतें हैं, इसका भी खाका तैयार होगा। मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी बनेगी
मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी बनाई जाएगी। इसके दो तिहाई सदस्य मेट्रोपॉलिटन रीजन में आने वाले नगर निगम, नगर पालिका और पंचायत के चुने हुए प्रतिनिधि होंगे। इन्हें रीजन की आबादी के अनुपात के हिसाब से शामिल किया जाएगा। कमेटी को महानगर के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं का जनसंख्या के आधार पर बंटवारा, नियोजित विकास, जमीन के उपयोग में परिवर्तन और उपलब्ध फंड के हिसाब से योजनाएं बनाकर राज्य सरकार को भेजने का अधिकार होगा। राज्य और केंद्र के बीच एमओयू साइन होगा
मेट्रोपॉलिटन रीजन में शामिल सभी शहरों के लिए केंद्र और राज्य से मिलने वाला फंड एक ही बैंक खाते में संयुक्त तौर पर आएगा। इसके लिए राज्य और केंद्र सरकार के बीच एक एमओयू साइन होगा। केंद्र और राज्य से मिलने वाला फंड मेट्रोपॉलिटन रीजन में शामिल शहरों के अनुपात में तय होगा। इसी अनुपात में विकास कार्यों के लिए राशि खर्च होगी। मेट्रोपॉलिटन एरिया बनने से 5 बड़े फायदे प्लान तैयार होने के बाद सीएम और मंत्रियों में होगी चर्चा
9 महीने में पूरा प्लान तैयार होने पर मुख्यमंत्री, जिले के प्रभारी मंत्री और जनप्रतिनिधियों की रायशुमारी होगी। जिसके बाद अंतिम फैसले पर मुहर लगेगी। हालांकि, जब सभी विभागों से सहमति प्राप्त होगी, तभी इसकी सर्वे रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा। उसमें भी शर्त है कि कंसल्टिंग एजेंसी पहले सिचुएशन एनालिसिस सहित अलग-अलग रिपोर्ट दे। हर स्टेज पर समय पर विभागों से मिलेगा, तभी यह काम 9 महीने में पूरा होगा। ये खबर भी पढ़ें… सड़क-नाली बनाने लोगों से पैसा लेगी सरकार, 50% खर्च करेंगे नगरीय निकाय मध्यप्रदेश में मोहल्ले-कॉलोनियों की सड़कें और नालियां जनभागीदारी से बनाने की योजना है। इनके निर्माण पर सरकार 50 फीसदी पैसा खर्च करेगी और 50 फीसदी पैसा आम लोगों से लिया जाएगा। जनभागीदारी से राशि इकट्ठा करने की जिम्मेदारी नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद की होगी। पढे़ं पूरी खबर…

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