छत्तीसगढ़ में सारस का आखिरी जोड़ा संकट में:एक चूजे की मौत, दूसरा लापता; सरगुजा में पहली बार दिखा हिमालय का शिकारी परिंदा

छत्तीसगढ़ में सारस पक्षियों की स्थिति चिंताजनक हो गई है। प्रदेश में अब सारस (क्रेन) का केवल एक जोड़ा बचा है, जो सरगुजा जिले के लखनपुर ब्लॉक में रहता है। यह जोड़ा राज्य में अपनी प्रजाति का आखिरी प्रतिनिधि है। यूं तो सरगुजा में 255 से ज्यादा पक्षियों की प्रजातियां मिलती हैं, लेकिन इनमें सारस क्रेन का खास महत्व है, क्योंकि यह आर्द्रभूमि (तालाबों और जलस्रोतों) के स्वास्थ्य का संकेतक होता है। जहां ये दिखते हैं, वहां पर्यावरण संतुलित माना जाता है। इनकी संख्या में कमी बताती है कि आसपास के पर्यावरण में गड़बड़ी है। हाल ही में छत्तीसगढ़ में सारस को लेकर एक शोध की गई, जिसमें प्रतीक ठाकुर, ए एम के भरोस, डॉ हिमांशु गुप्ता और रवि नायडू शामिल थे। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के बिलासपुर और सरगुजा में पहली बार हिमालय का शिकारी परिंदा देखा गया है। जिसे ‘पूर्वी मार्श हैरियर’ के नाम से जाना जाता है। एक चूजे को जंगली जानवर ने मार दिया रिसर्च में सारस को लेकर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। प्रतीक ठाकुर ने बताया कि सारस का यह जोड़ा बीते कई सालों से लखनपुर के जमगला और तराजू वाटर टैंक के आसपास देखा जा रहा है। 2022 में इनके दो चूजे हुए थे, जिससे उम्मीद जगी थी कि इनकी संख्या बढ़ेगी। लेकिन दिसंबर 2023 में एक चूजे को जंगली जानवर ने मार दिया। सारस एक समय में दो ही बच्चे पैदा करते हैं शोध के मुताबिक, सारस एक समय में दो ही बच्चे पैदा करते हैं। जिनमें से एक वयस्क होने से पहले ही मर जाता है। दूसरा चूजा ही वयस्क हो पाता है, उड़ना सीखा और अपने माता-पिता से जीवन के जरूरी हुनर सीखता है। हालांकि, हाल ही में वह भी लापता है और संभवतः अपने जीवनसाथी की तलाश में है। इस जोड़े का मुख्य निवास लखनपुर है, लेकिन भोजन की तलाश में यह आसपास के खेतों, छोटे तालाबों और रीहंद नदी के किनारे तक जाता है। इनके सामने कई समस्याएं हैं। जैसे तालाबों में मछली पकड़ने की बढ़ती गतिविधियां, जालों से इनके घोंसलों को खतरा होता है। रसायनों का इस्तेमाल-कुत्तों का हमला बड़ा खतरा खेतों में जहरीले रसायनों का इस्तेमाल, इनके भोजन में जहर मिल सकता है। आवारा कुत्तों का हमला सारस के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इसके अलावा अवैध रेत खनन से भी इनके प्राकृतिक आवास खत्म हो रहे हैं। हालांकि प्रशासन और पर्यावरण कार्यकर्ता सारस को बचाने के लिए कोशिश कर रहे हैं। पोस्टर लगाकर लोगों को जागरूक किया गया है। कई ग्रामीणों ने इन पर नजर रखना शुरू किया है, लेकिन अनियंत्रित मानवीय गतिविधियां अब भी बड़ी समस्या है। पहली बार दिखा हिमालय का शिकारी परिंदा सारस की चिंता के बीच बिलासपुर के सीपत डैम और सरगुजा के तराजू गांव में पहली बार ‘पूर्वी मार्श हैरियर’ नामक शिकारी पक्षी देखा गया है। यह पक्षी एशिया के कुछ हिस्सों में मिलता है, लेकिन छत्तीसगढ़ में इसे पहले कभी नहीं देखा गया था। यह दिखाता है कि अगर जलस्रोतों की देखभाल की जाए, तो राज्य में अन्य दुर्लभ प्रजातियां भी लौट सकती हैं। सवाल यह है कि क्या हम समय रहते कदम उठाएंगे या सारस को खो देंगे? रिसर्च में शामिल सदस्यों की प्रोफाइल- ………………….. ये खबर भी पढ़ें… प्रवासी पक्षियों से गुलजार खैरागढ़..ब्राह्मणी बतख भी दिखी: जिले में 213 प्रजाति के पक्षी; वेटलैंड्स में 90 रंगबिरंगे सारस, 1100 से ज्यादा बत्तख दिखे छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ इस समय प्रवासी पक्षियों से गुलजार है। जिले में 213 प्रजाति के पक्षी मिले हैं। रूस के कॉमन क्रेन पक्षी के अलावा 90 पेंटेड स्टॉर्क्स और 1100 से अधिक प्रवासी बत्तखें देखी गई हैं। जलचर पक्षियों में नॉर्दर्न शोवलर, यूरेशियन कर्ल्यू और कॉमन पोचार्ड शामिल हैं। पढ़ें पूरी खबर

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *